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पश्चिम एशिया में ड्रोन जंग का नया दौर, सेंटकॉम का ‘फाल्कन स्ट्राइक’ प्लान

13/8/2026, 7:47:27 pm
पश्चिम एशिया में ड्रोन जंग का नया दौर, सेंटकॉम का ‘फाल्कन स्ट्राइक’ प्लान
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पश्चिम एशिया में ड्रोन युद्ध का नया चरण शुरू करने की योजना बनाई है। इस योजना का नाम ‘फाल्कन स्ट्राइक’ रखा गया है और इसका मकसद क्षेत्र में बढ़ते ड्रोन खतरों का त्वरित जवाब देना है। सैन्य सूत्रों के अनुसार यह प्लान खास तौर पर ईरान समर्थित मिलिशिया और हूती विद्रोहियों के हमलों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पेंटागन के अधिकारियों ने बताया कि फाल्कन स्ट्राइक के तहत उन्नत ड्रोन तैनात होंगे जो निगरानी और सटीक हमला दोनों कर सकेंगे। ये ड्रोन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस होंगे और इन्हें दूर से संचालित किया जा सकेगा। पहला चरण अगले कुछ महीनों में शुरू होने की संभावना है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस अभियान की कमान कौन संभालेगा। सेंटकॉम प्रमुख जनरल माइकल कुरिल्ला ने अभी तक किसी कमांडर की घोषणा नहीं की है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि एक संयुक्त कार्य बल बनाया जा सकता है जिसमें वायु सेना, नौसेना और विशेष बलों के अधिकारी शामिल हों। इजराइल और खाड़ी देशों ने इस पहल का स्वागत किया है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने खुफिया जानकारी साझा करने की पेशकश की है। वहीं ईरान ने इसे भड़काऊ कदम बताते हुए चेतावनी दी है कि क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा। जानकारों का कहना है कि ड्रोन युद्ध का यह नया रूप पारंपरिक सैन्य संतुलन बदल सकता है। सस्ते और सटीक ड्रोन महंगे हथियार प्रणालियों को चुनौती दे रहे हैं। फाल्कन स्ट्राइक इसी बदलती रणनीति का हिस्सा है। अमेरिका ने पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में ड्रोन हमलों की संख्या में तेज वृद्धि देखी है। जनवरी 2024 में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन हमले किए थे। इसके बाद सेंटकॉम ने अपनी निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए नए सेंसर और संचार उपकरण तैनात किए। फाल्कन स्ट्राइक के तहत इन संसाधनों को एकीकृत कमांड ढांचे में लाया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025 के बजट में इस कार्यक्रम के लिए 1.2 अरब डॉलर का प्रावधान किया गया है। अमेरिकी कांग्रेस की सैन्य समिति ने इस खर्च की समीक्षा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक का विस्तार क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को फिर से परिभाषित करेगा। भारत भी इस विकास पर नज़र रख रहा है क्योंकि हिंद महासागर में सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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