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शिक्षक दिवस विशेष: बिहार की शिक्षिका चंचला तिवारी की प्रेरक यात्रा

5/9/2026, 2:55:33 am
शिक्षक दिवस विशेष: बिहार की शिक्षिका चंचला तिवारी की प्रेरक यात्रा
शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार की एक ऐसी शिक्षिका की कहानी सुनी जा रही है, जिसने जीवन के कठिन मोड़ों को अवसर में बदल दिया। चंचला तिवारी एक छोटे से गांव से आती हैं, जहाँ उनके पिता की premature demise ने परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया। कुछ ही साल बाद उनके इकलौते भाई का भी निधन हो गया, जिससे उन्हें छोटी उम्र में परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। इन दुखद घटनाओं के बावजूद, चंचला ने पढ़ाई जारी रखी और स्थानीय सरकारी स्कूल में सहायक शिक्षक की नौकरी प्राप्त की। उन्होंने दिन में कक्षा लेते हुए रात को अपनी पढ़ाई पूरी की, जिससे स्नातक और फिर बी.एड की डिग्री हासिल हुई। उनकी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को न सिर्फ किताबी ज्ञान मिलता है, बल्कि जीवन के मूल्य भी सिखाए जाते हैं। चंचला की बेटी, जो अब पांच साल की है, उनकी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। माँ-बेटी दोनों मिलकर सुबह की प्रार्थना करते हैं, फिर चंचला स्कूल जाती हैं और बेटी को पड़ोस की आंगनवाड़ी में छोड़ देती हैं। वह चाहती हैं कि उसकी बेटी शिक्षा के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाए और समाज में अपनी पहचान बनाए। समाज में उनकी मेहनत को देखा गया है: कई छात्र बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर चुके हैं और कुछ ने उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति हासिल की है। उनके सहकर्मी उन्हें 'साहसी शिक्षिका' कहते हैं, जबकि ग्रामीण अभिभावक उनकी सलाह पर भरोसा करते हैं। शिक्षक दिवस पर चंचला का संदेश स्पष्ट है – 'कठिनाइयाँ आएँगी, लेकिन शिक्षा का दिया नहीं बुझाना चाहिए।' उनकी कहानी बिहार के अन्य शिक्षकों और युवा महिलाओं को यह दिखाती है कि संकल्प और मेहनत से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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