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चिदंबरम के 'दिमाग़ी नक्सल' बयान पर घमासान, कार्यकाल की दिलाई याद

17/8/2026, 1:43:54 am
चिदंबरम के 'दिमाग़ी नक्सल' बयान पर घमासान, कार्यकाल की दिलाई याद
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पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने शनिवार को एक साहित्यिक कार्यक्रम में खुद को 'दिमाग़ी नक्सल' कहे जाने पर गर्व जताया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई। भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कुछ जाने-माने पत्रकारों ने चिदंबरम की कड़ी आलोचना की है। 'दिमाग़ी नक्सल' या 'अर्बन नक्सल' शब्द का इस्तेमाल पिछले कुछ सालों में उन सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और बुद्धिजीवियों के लिए किया जाता रहा है जिन्हें भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार किया गया था। चिदंबरम ने इसी लेबल को लेकर कहा, "अगर मानवाधिकारों की बात करना, दलितों-आदिवासियों के हक़ में बोलना और संविधान की रक्षा करना नक्सल होना है, तो मुझे गर्व है कि मैं दिमाग़ी नक्सल हूँ।" भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने तुरंत ट्वीट कर कहा, "पूर्व गृह मंत्री देश विरोधी ताकतों के साथ खड़े दिख रहे हैं। यह कांग्रेस की मानसिकता दर्शाता है।" वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने उनके बयान को गैर-जिम्मेदाराना और देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी पूर्व गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि चिदंबरम उन लोगों का समर्थन कर रहे हैं जो देश को तोड़ना चाहते हैं। सोशल मीडिया पर आम लोगों ने चिदंबरम के गृह मंत्री के कार्यकाल को याद दिलाया। ट्विटर और फेसबुक पर यूजर्स ने लिखा कि जब वे गृह मंत्री थे (2008-2012), तब नक्सलवाद से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए। कई लोगों ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले, बाटला हाउस एनकाउंटर और ऑपरेशन ग्रीन हंट का ज़िक्र करते हुए सवाल किए। कुछ यूजर्स ने यह भी पूछा कि उनके कार्यकाल में कितने नक्सली मारे गए या सरेंडर हुए। हालांकि, चिदंबरम ने रविवार को सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल अभिव्यक्ति की आज़ादी, मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों के पक्ष में बोल रहे थे। कांग्रेस पार्टी ने भी अपने नेता का बचाव करते हुए कहा कि भाजपा असहमति की आवाज़ को कुचलने के लिए 'अर्बन नक्सल' जैसे लेबल गढ़ती है। यह विवाद एक बार फिर 'अर्बन नक्सल' की परिभाषा, इसके राजनीतिक इस्तेमाल और अभिव्यक्ति की आज़ादी की सीमाओं पर बहस को तेज़ कर गया है।समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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