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चीन के सरकारी मीडिया ने बदला स्वर, भारत से आर्थिक सहयोग की बात

11/9/2026, 11:41:00 pm
चीन के सरकारी मीडिया ने बदला स्वर, भारत से आर्थिक सहयोग की बात
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चीन के सरकारी मीडिया ने अपने स्वर में बदलाव लाते हुए भारत के साथ आर्थिक सहयोग पर चर्चा शुरू करने की बात कही है। इस बदलाव के पीछे चीन की आर्थिक वृद्धि में धीमापन और वैश्विक बाजार में नई साझेदारियों की तलाश मानी जा रही है। विशेषकर शी जिनपिंग के प्रस्तावित दिल्ली दौरे को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत का माहौल बन रहा है। सरकारी अखबार "人民日報" और टेलीविज़न चैनल CCTV ने हालिया संपादकीय में कहा कि चीन भारत के विशाल बाजार और तकनीकी क्षमता का लाभ उठाना चाहता है। उन्होंने लिखा कि दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को कम करने और निवेश प्रवाह को बढ़ाने के लिए संयुक्त प्रयास जरूरी है। इस बयान से पहले चीन की टिप्पणियां अक्सर सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित रहती थीं। विश्लेषकों का मानना है कि इस tonal shift का मुख्य कारण चीन की आर्थिक वृद्धि दर का पिछले दो वर्षों में 5 प्रतिशत से नीचे रहना है। यूरोप और अमेरिका में मांग कमजोर पड़ने के कारण चीन को नए बाजारों की तलाश है। भारत, जिसकी मध्यम वर्ग की आंख तेजी से बढ़ रही है और डिजिटल आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ रहा है, उसकी ओर आकर्षित हो रहा है। दिल्ली में शी जिनपिंग की यात्रा की अभी आधिकारिक तिथि तय नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच राजनयिक चैनलों पर तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार यात्रा के दौरान व्यापार समझौते, तकनीक स्थानांतरण और जलवायु परिवर्तन पर सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी भी भारत के पास होने की बात कही जा रही है, जो इस यात्रा के महत्व को और बढ़ा देती है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि वे चीन के साथ संतुलित और पारदर्शी व्यापार संबंध बनाने को तैयार हैं। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी समझौते में भारतीय उद्योगों की रक्षा और स्थानीय रोजगार सृजन सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगा। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों देश बातचीत को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाते हैं तोbilateral trade जो वर्तमान में लगभग 125 अरब डॉलर है, उसे अगले पांच साल में 200 अरब डॉलर तक ले जाने की संभावना है। इसके लिए दोनों sides को टैरिफ बाधाओं को कम करना, निवेश नियमों को सरल बनाना और बौद्धिक संपदा権 के संरक्षण पर सहमत होना होगा। अंत में देखा जा रहा है कि चीन के सरकारी मीडिया का यह नया postura न केवल आर्थिक बल्कि राजकीय संदेश भी दे रहा है। यह दर्शाता है कि बीजिंग अपने पड़ोसी देशों के साथ Conflict को कम करके सहयोगात्मक माहौल बनाना चाहता है। आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के अधिकारियों की बैठकों का सिलसिला जारी रहेगा, जिनके परिणाम भविष्य में भारत-चीन संबंधों की दिशा तय करेंगे। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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