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सीजेआई ने ब्रिक्स मुख्य न्यायाधीशों के मंच पर सामान्य प्लेटफ़ॉर्म का प्रस्ताव रखा
5/9/2026, 12:47:03 am

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भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने बीआरआईसीएस मुख्य न्यायाधीशों के मंच पर एक सामान्य मंच बनाने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें सदस्य देशों के बीच वाणिज्यिक विवादों का समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसा मंच व्यावसायिक लेन‑देन से जुड़े मामलों को तेजी से और कम खर्च में निपटाने में मदद करेगा। प्रस्ताव के अनुसार, इस प्लेटफ़ॉर्म पर एक uniform नियमावली होगी जिसका पालन सभी पक्षों को करना होगा।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि वर्तमान में कंपनियों को अपने देश की अदालतों या विदेशी tribunals में जाना पड़ता है, जिससे प्रक्रिया लंबी और महंगी हो जाती है। एक共同 मंच से ऐसी अनिश्चितता कम होगी और पक्षों को एक ही जगह पर अपना मामला रखने का विकल्प मिलेगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय एमएसएमई जो चीन, ब्राज़ील या रूस में माल बेचते हैं, अक्सर भुगतान में देरी या अनुबंध उल्लंघन की समस्या झेलते हैं। ऐसे मामलों में एक predetermined प्रक्रिया होने से वे जल्दी मुआवजा पा सकते हैं।
प्रस्ताव में सुझाया गया है कि मंच का सचिवालय प्रत्येक साल किसी सदस्य देश में rota basis पर स्थापित किया जाएगा। इससे सभी देशों को समान अवसर मिलेगा और कोई एक राष्ट्र इसकी नियंत्रण में नहीं रहेगा।
बीआरआईसीएस के अन्य मुख्य न्यायाधीशों की प्रतिक्रिया मिली‑जुली रही। रूस के चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि नियम स्पष्ट और बाध्यकारी हों तो यह कदम स्वागतयोग्य है। वहीं, ब्राज़ील के प्रतिनिधि ने चेतावनी दी कि राष्ट्रीय कानूनों में अंतर को दूर करना आसान नहीं होगा।
चीन के प्रतिनिधि ने तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म पर ज़ोर देते हुए कहा कि ई‑फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई से प्रक्रिया और भी सरल बन सकती है। उन्होंने एक पायलट‑project की बात भी की, जिसे पहले चरण में केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों पर लागू किया जा सकता है।
भारतीय विध विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मंच की अवार्ड्स को न्यूयॉर्क कन्वेंशन जैसी internationally recognized व्यवस्थाओं के तहत enforceable बनाया जाए तो इसका असर अधिक होगा। उन्होंने सलाह दी कि पहले एक memorandum of understanding (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएं।
अगले कदम के रूप में, बीआरआईसीएस न्यायिक समिति एक कार्य समूह गठित करेगी जो छह महीने के भीतर ड्राफ्ट नियमावली तैयार करेगी। इस drafter को अगले शिखर सम्मेलन में रखा जाएगा, जहाँ सदस्य देशों की सरकारों की भी राय ली जाएगी।
यदि यह पहल सफल रही तो यह केवल बीआरआईसीएस तक सीमित नहीं रहेगी; अन्य regionales blocs जैसे अफ्रीकी संघ या ASEAN भी इसी तरह का मंच अपना सकते हैं। इससे global trade dispute resolution की Landschaft में बदलाव आ सकता है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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