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डॉक्टर बनने का पूरा रास्ता: NEET से लेकर विदेश में नौकरी तक

23/8/2026, 1:01:35 pm
डॉक्टर बनने का पूरा रास्ता: NEET से लेकर विदेश में नौकरी तक
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भारत में डॉक्टर बनने का सपना लाखों छात्र देखते हैं, लेकिन सही रास्ता कम लोगों को पता होता है। पहला और सबसे जरूरी पड़ाव है NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट)। बिना इसके न तो सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिलती है, न ही प्राइवेट में। 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के साथ कम से कम 50% अंक होने चाहिए। आरक्षित वर्ग के लिए यह सीमा 40% है। NEET पास करने के बाद काउंसलिंग के जरिए MBBS या BDS में दाखिला मिलता है। MBBS साढ़े चार साल का कोर्स है, जिसके बाद एक साल की इंटर्नशिप अनिवार्य होती है। इस दौरान छात्र अस्पताल में मरीज देखना, केस हिस्ट्री लिखना और इमरजेंसी हैंडल करना सीखते हैं। इंटर्नशिप पूरी होने पर ही मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन होता है और प्रैक्टिस का लाइसेंस मिलता है। MBBS के बाद दो रास्ते खुलते हैं। पहला — NEET PG देकर MD या MS में स्पेशलाइजेशन। इसमें तीन साल लगते हैं। दूसरा — सीधे नौकरी। सरकारी अस्पतालों में जूनियर रेजिडेंट या मेडिकल ऑफिसर की वैकेंसी निकलती रहती हैं। शुरुआती वेतन 60-70 हजार रुपये महीने के आसपास होता है, जो अनुभव के साथ बढ़ता जाता है। विदेश में प्रैक्टिस का सपना देखने वालों के लिए अलग प्रक्रिया है। अमेरिका के लिए USMLE, ब्रिटेन के लिए PLAB, कनाडा के लिए MCCQE और ऑस्ट्रेलिया के लिए AMC पास करना पड़ता है। इन परीक्षाओं की तैयारी में दो-तीन साल लग जाते हैं। खर्चा भी 30-50 लाख रुपये तक आ सकता है। लेकिन एक बार लाइसेंस मिलने पर वेतन भारत के मुकाबले कई गुना ज्यादा होता है। कुछ छात्र MBBS के बाद MBA इन हॉस्पिटल मैनेजमेंट या पब्लिक हेल्थ में MPH करते हैं। ये नॉन-क्लिनिकल रोल खोलते हैं — हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, हेल्थ पॉलिसी, मेडिकल राइटिंग वगैरह। सलाह एक ही है: 11वीं से ही NEET की तैयारी गंभीरता से शुरू करें। कोचिंग मदद करती है, लेकिन सेल्फ स्टडी और मॉक टेस्ट ज्यादा जरूरी हैं। डॉक्टर बनना सिर्फ डिग्री लेना नहीं, जिंदगी भर सीखते रहना है।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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