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क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट हटे 74 साल हुए, पर खानाबदोश समुदायों को अब भी नहीं मिला सम्मान

12/9/2026, 2:36:59 pm
क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट हटे 74 साल हुए, पर खानाबदोश समुदायों को अब भी नहीं मिला सम्मान
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ब्रिटिश हुकूमत ने 1871 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट लागू किया और लगभग दो सौ खानाबदोश समुदायों को जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया। अंग्रेज़ों की नज़र में वही सभ्य था जो एक गाँव में बसता हो, ज़मीन रखता हो और पक्का पता दे सके। घूमंतू जीवन — चाहे पशुपालन हो, मनोरंजन हो या हस्तशिल्प — उन्हें खतरनाक लगा और पूरे समूह पर सामूहिक कलंक लगा दिया गया। 1952 में आज़ाद भारत ने यह काला क़ानून रद्द किया और उन समूहों को ‘विमुक्त जाति’ का दर्जा दिया। संविधान में उन्हें समान अधिकार मिले, लेकिन ज़मीनी स्तर पर नौकरशाही ने पुरानी मानसिकता नहीं छोड़ी। आज भी अधिकांश विमुक्त जाति के लोगों के पास कोई स्थायी पता नहीं है, जिसकी वजह से वे आधार, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ नहीं बनवा पाते। बिना स्थायी पते के आधार कार्ड नहीं बनता, आधार के बिना राशन कार्ड नहीं मिलता और राशन कार्ड के बगैर सरकारी योजनाओं — जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत या वृद्धावस्था पेंशन — का लाभ दूर की कौड़ी रहता है। महाराष्ट्र के पारधी, राजस्थान के बावरिया, मध्य प्रदेश के सांसी और तमिलनाडु के नरीकोरवर सभी एक जैसी परेशानी बताते हैं। पुलिस आज भी उन्हें शक की निगाह से देखती है और अक्सर बिना किसी सबूत के गिरफ़्तार कर लेती है। स्कूल में दाख़िला हो या अस्पताल में इलाज, हर कदम पर ‘पता प्रमाण’ माँगा जाता है। कई राज्यों ने विमुक्त जाति आयोग बनाए, कुछ ने आरक्षण की बात कही, पर अमल धीमा है और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी साफ दिखती है। 2018 में बने डीएनटी आयोग (डीनोटिफाइड, नोमैडिक एंड सेमी-नोमैडिक ट्राइब्स) ने विस्तृत सिफ़ारिशें दीं — मोबाइल कैंप के ज़रिए आधार, राशन, पेंशन और स्वास्थ्य कार्ड एक साथ बनाना, ज़मीन का पट्टा देना और शिक्षा में विशेष कोटा। मगर केंद्र और राज्य सरकारों ने अब तक उन सिफ़ारिशों को आधा-अधूरा ही लागू किया है। समाजशास्त्री कहते हैं कि असली बदलाव तब आएगा जब प्रशासन ‘स्थायी पता’ की जिद छोड़कर गांव‑गांव जाकर कैंप लगाए और दस्तावेज़ हाथों‑हाथ दे। तब तक ‘सिर्फ़ काग़ज़ पर आज़ादी’ का आरोप सच ही लगेगा। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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