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कच्चा तेल 108 डॉलर के ऊपर, पश्चिम एशिया के तनाव से भारत पर क्या असर?

11/9/2026, 4:33:14 am
कच्चा तेल 108 डॉलर के ऊपर, पश्चिम एशिया के तनाव से भारत पर क्या असर?
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जबकि पिछले हफ्ते यह लगभग 90 डॉलर के पास था। विश्लेषकों का मानना है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचा तो कीमत 120 डॉलर तक पहुंच सकती है। भारत अपनी तेल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होना सीधे तौर पर आयात बिल को बढ़ाता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है और रुपये की कीमत में कमजोरी आ सकती है। व्यापार घाटा (कैड) भी चौड़ा हो सकता है, जिससे मैक्रो आर्थिक संतुलन पर असर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अभी स्थिर हैं क्योंकि तेल विपणन कंपनियों ने पिछले कई महीनों से दरें नहीं बढ़ाई हैं। लेकिन अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर बना रहता है तो कंपनियों को अंततः मूल्य वृद्धि करनी पड़ सकती है। इसका सीधा असर परिवहन लागत, खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा के खर्च पर दिखाई देगा। सरकार के सामने सीमित विकल्प हैं। एक्साइज ड्यूटी कम करने से राजस्व में कमी आएगी, जबकि उपभोक्ताओं को सब्सिडी देना वित्तीय घाटा बढ़ा देगा। 2022 में यूक्रेन संकट के बाद तेल prices में तेजी आई थी तब सरकार ने एक्साइज घटाकर कुछ राहत दी थी। भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई पर करीबी नजर रखे हुए है। यदि तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाती है, जिससे लोन महंगे बने रह सकते हैं। तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार स्थिति पर निरंतर नजर रखे हुए है और रणनीतिक petroleum reserves का उपयोग किया जा सकता है, हालांकि ये reserves केवल कुछ हफ्तों की खपत पूरी कर सकते हैं। इंटरनेशनल एजेंसियों का अनुमान है कि यदि तनाव जारी रहा तो वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखे जा सकते हैं। विकासशील देशों में आयात लागत बढ़ने से विकास दर पर असर पड़ सकता है। भारत सरकार ने ऊर्जा विविधीकरण पर जोर देते हुए नवीकरणीय स्रोतों में निवेश बढ़ाने की योजना बनाई है, लेकिन त्वरित परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती। आम नागरिक के लिए अभी इंतजार के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है। यदि पश्चिम एशिया में शांति नहीं बनती तो आने वाले महीनों में घरेलू बजट और अधिक तंग हो सकते हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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