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डांस: दिमाग की कसरत जो जॉगिंग और सुडोकू दोनों को मात दे

14/8/2026, 5:18:31 am
डांस: दिमाग की कसरत जो जॉगिंग और सुडोकू दोनों को मात दे
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डांस करना सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि दिमाग के लिए पूरी कसरत है। वैज्ञानिकों के अनुसार डांस करना कुछ-कुछ वैसा ही है जैसे आप जॉगिंग कर रहे हों और साथ में सुडोकू भी हल कर रहे हों। शरीर गतिमान रहता है और दिमाग भी पूरी रफ्तार से काम करता है। हालिया शोध बताते हैं कि नियमित डांस से दिमाग की संरचना और कार्यक्षमता दोनों में सुधार आता है। विशेषज्ञों ने चार प्रमुख फायदे गिनाए हैं। पहला, नए डांस स्टेप्स और सीक्वेंस सीखने से दिमाग में नए न्यूरल कनेक्शन बनते हैं। यह प्रक्रिया न्यूरोप्लास्टिसिटी कहलाती है और उम्र बढ़ने के साथ दिमाग को लचीला बनाए रखती है। दूसरा फायदा है एकाग्रता और याददाश्त में इजाफा। संगीत की ताल पर कदम मिलाना, अगले स्टेप की योजना बनाना और साथी के साथ तालमेल बिठाना — ये सब दिमाग के कई हिस्सों को एक साथ सक्रिय करते हैं। इससे कार्यकारी क्षमता यानी एक्जीक्यूटिव फंक्शन मज़बूत होता है। तीसरा, सामाजिक पहलू। पार्टनर डांस या ग्रुप डांस में दूसरों के साथ तालमेल, आंखों का संपर्क और गैर-मौखिक संवाद होता है। यह सामाजिक बोध और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को धार देता है। अकेलापन भी दूर होता है जो बुजुर्गों में दिमागी गिरावट का बड़ा कारण है। चौथा और शायद सबसे तात्कालिक फायदा — खुशी के हार्मोन। डांस करते समय डोपामाइन, सेरोटोनिन और एंडॉर्फिन निकलते हैं। ये तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल को घटाते हैं। नतीजा: मूड बेहतर, नींद अच्छी, चिंता कम। अच्छी बात यह है कि फायदे के लिए पेशेवर डांसर बनना ज़रूरी नहीं। हफ्ते में दो-तीन बार, सिर्फ 30-40 मिनट काफी हैं। सालसा, भांगड़ा, गरबा, ज़ुंबा या घर पर ही पसंदीदा गाने पर थिरकना — जो पसंद हो वही चुनें। नियमित अभ्यास से दिमाग तेज़ होता है, याददाश्त सुधरती है और अल्ज़ाइमर का खतरा घटता है। आज ही संगीत बजाएं और थिरकना शुरू करें।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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