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डांगावास नरसंहार: 40 अभियुक्त बरी, पीड़ित परिवार लड़ेगा आगे

15/8/2026, 10:10:55 am
डांगावास नरसंहार: 40 अभियुक्त बरी, पीड़ित परिवार लड़ेगा आगे
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राजस्थान के डांगावास गांव में 2015 में जमीन विवाद के दौरान एक दलित परिवार पर हमला हुआ था। विवाद की जड़ एक छोटी कृषि भूमि को लेकर थी जिसे दोनों पक्ष अपना बताते थे। हमले में पांच लोगों की मौत हो गई और ग्यारह लोग घायल हुए। मरने वालों में परिवार के मुखिया, उनकी पत्नी और तीन बच्चे शामिल थे। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां कई की हालत गंभीर बनी रही। मामला लंबे समय तक अदालत में चला और हाल ही में एससी-एसटी कोर्ट ने चालीस अभियुक्तों को बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत सबूत पर्याप्त नहीं हैं और गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। फैसले के बाद पीड़ित परिवार के सदस्यों ने गहरी निराशा जताई और कहा कि वे ऊपरी अदालत में अपील करेंगे। परिवार के वकील ने बताया कि वे नए सबूत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं और जल्द ही हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। स्थानीय दलित संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फैसले को दलितों के प्रति अन्याय बताया और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी। उन्होंने मांग की कि मामले की फिर से जांच हो और दोषियों को सजा मिले। पुलिस ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और अब कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी संबंधित दस्तावेज कोर्ट को सौंप दिए गए हैं। मामला राष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चा का विषय बना हुआ है और कई मानवाधिकार संगठनों ने न्याय की मांग उठाई है। सोशल मीडिया पर भी लोग फैसले की आलोचना कर रहे हैं। अब देखना होगा कि ऊपरी अदालत क्या फैसला लेती है और पीड़ित परिवार को कब न्याय मिलेगा। परिवार का कहना है कि वे हार नहीं मानेंगे और लड़ाई जारी रखेंगे। इस मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे की सुनवाई 11 साल तक चली। पहले निचली अदालत ने कुछ अभियुक्तों को दोषी ठहराया था, लेकिन ऊपरी अदालत ने तकनीकी आधार पर फैसला पलट दिया। इसके बाद मामला विशेष एससी-एसटी कोर्ट में स्थानांतरित हुआ जहां अंतिम सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने कहा कि वह फैसले का अध्ययन करेगी और जरूरी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। विपक्षी दलों ने फैसले को दलित विरोधी बताया और विधानसभा में चर्चा की मांग की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है और अपनी टीम को जांच के लिए भेजने का निर्देश दिया। आयोग ने कहा कि दलितों के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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