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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.12 करोड़ की ठगी, छह गिरफ्तार

17/9/2026, 7:56:13 pm
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.12 करोड़ की ठगी, छह गिरफ्तार
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मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया। आरोपियों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लोगों से 1.12 करोड़ रुपये वसूले। गिरोह में एक आईआईटी ग्रेजुएट और एक बैंक मैनेजर भी शामिल हैं। पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो तकनीकी विशेषज्ञ, एक बैंक अधिकारी और तीन सहयोगी हैं। ठगों ने फर्जी कानूनी नोटिस और वीडियो कॉल के जरिए शिकार को यह विश्वास दिलाया कि उसके खिलाफ अदालती कार्रवाई चल रही है। डर के मारे कई लोग तुरंत रकम ट्रांसफर कर देते थे। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने पिछले छह महीने में करीब 40 लोगों को निशाना बनाया। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई बैंक खातों के विवरण जब्त किए। इन उपकरणों से ठगी की पूरी चेन का पता चला। बैंक मैनेजर ने अपने खाते का इस्तेमाल रकम को आगे भेजने के लिए किया था। आईआईटी ग्रेजुएट ने तकनीकी जानकारी का उपयोग करके फर्जी वेबसाइट और एसएमएस गेटवे तैयार किए। उसने ही डिजिटल अरेस्ट का नकली नोटिस तैयार किया था। पुलिस ने उसके लैपटॉप से कई स्क्रिप्ट और टेम्पलेट बरामद किए। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मामले की आगे की जांच जारी है और अधिक पीड़ितों की पहचान की जा रही है। साइबर क्राइम यूनिट के प्रमुख ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। आधिकारिक एजेंसी कभी भी फोन पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती। पुलिस ने बताया कि गिरोह ने सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए संभावित शिकार की पहचान की। पहले वे व्यक्ति की निजी जानकारी जुटाते थे, फिर उसे फर्जी नोटिस भेजते थे। इस प्रक्रिया में वे बैंक खाते की डिटेल भी मांगते थे। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी नई तकनीक ठगों के लिए आसान हथियार बन गई है। लोगों को अपने खाते की जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए। बैंक भी ग्राहकों को ऐसी धमकियों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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