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ए. राजा ने निर्मल कुमार पर टिप्पणी वापस ली, लेकिन दी चेतावनी
13/9/2026, 5:14:38 am

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चेन्नई से आए तमिलनाडु के वरिष्ठ मंत्री ए. राजा ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री निर्मल कुमार पर एक टिप्पणी की, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। राजा ने कहा कि निर्मल कुमार की नीतियां तमिलनाडु के विकास में बाधा बन रही हैं और उन्हें केंद्र की नीतियों का अनुयायी बताया। इस बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए डीएमके की शीर्ष नेतृत्व ने नाराज़गी जताई और कहा कि ऐसा भाषा पार्टी के सिद्धांतों के विपरीत है। पार्टी ने राजा को तुरंत अपना बयान वापस लेने को कहा, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए कहा कि उनका इरादा किसी की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं था। हालांकि, राजा ने साथ ही एक सख्त चेतावनी भी दी कि यदि केंद्र政府 तमिलनाडु की मांगों को अनसुनी करती रहती है तो डीएमके आगे और कड़ा रुख अपनाएगी।
इस टिप्पणी के पीछे राजा का इतिहास भी देखा जा रहा है। पिछले साल उन्होंने तमिलनाडु में केंद्र की आर्थिक नीतियों पर भी समान टिप्पणी की थी, जिस पर तब भी पार्टी ने सफाई मांगी थी। इस बार की घटना को कुछ विश्लेषक इसलिए गंभीर मान रहे हैं क्योंकि यह तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। राजा ने अपने बयान में बताया कि केंद्र की नीतियों से राज्य के छोटे व्यापारियों और किसानों को नुकसान हो रहा है, इसलिए उन्होंने आवाज़ उठाई। लेकिन डीएमके ने स्पष्ट किया कि जबकि उनकी शिकायतें वैध हो सकती हैं, अभिव्यक्ति का तरीका पार्टी के अनुशासन को कमजोर करता है। इसलिए उन्होंने तत्काल बयान वापस लेने का आदेश दिया, जिसे राजा ने तुरंत मान लिया। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र की ओर से कोई संवेदनशील कदम नहीं उठाया जाता तो पार्टी आंदोलनात्मक रुख अपनाएगी, जिसमें सड़क प्रदर्शन और आर्थिक बाधा डालने वाले कदम शामिल हो सकते हैं।
भाजपा ने इस मामले को अवसरवादी करार देते हुए कहा कि राजा का बयान प्रदर्शित करता है कि डीएमके सिर्फ़ चुनावी लाभ के लिए मुद्दों को उठाती है। कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने संयम बनाए रखने की अपील की, ताकि केंद्र‑राज्य संबंधों में आगे की खटास न बढ़े। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से चुप्पी साध रखी है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे राजा के बयान से नाखुश हैं और आंतरिक चर्चा चल रही है।
केंद्रीय मंत्री निर्मल कुमार ने किसी भी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दिए बिना अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखने की बात कही। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राजा का यह उलटफेर दर्शाता है कि डीएमके अपने सहयोगियों को भी संतुलित रखने की कोशिश कर रही है, वहीं अपनी राज्यस्तरीय मांगों पर जोर नहीं छोड़ रही। इस विवाद के बीच, राज्य में पानी साझाकरण, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष बातचीत का रास्ता चुनते हैं तो स्थिति को शांत किया जा सकता है, अन्यथा आने वाले महीनों में राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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