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भारत

पोखरण में ड्रोनाथॉन-2026: स्वदेशी ड्रोन और काउंटर‑ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन

7/9/2026, 11:41:34 pm
पोखरण में ड्रोनाथॉन-2026: स्वदेशी ड्रोन और काउंटर‑ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन
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पोखरण में 14 सितंबर से ड्रोनाथॉन-2026 शुरू होगा। भारतीय वायु सेना इस आयोजन की मेजबानी कर रही है। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में देश भर के स्टार्टअप, रक्षा अनुसंधान संस्थान और निजी कंपनियां अपने स्वदेशी ड्रोन और ड्रोन‑रोधी प्रणालियाँ प्रदर्शित करेंगे। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा कि ड्रोनाथॉन का मकसद स्वदेशी तकनीक को सामने लाना और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। प्रदर्शनी में छोटे निगरानी ड्रोन, लॉजिस्टिक्स ड्रोन, स्वार्म टेक्नोलॉजी और जैमर‑आधारित काउंटर‑ड्रोन सिस्टम शामिल होंगे। लाइव डेमो में ड्रोन को टारगेट को पहचानने, ट्रैक करने और निष्क्रिय करते हुए दिखाया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि इस आयोजन से नए प्रोटोटाइप की त्वरित परीक्षण और सेना में शामिल करने की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही उद्योग को सरकारी खरीद प्रक्रिया की जानकारी भी मिलेगी। पोखरण का चयन इसकी खुली हवाई सीमा और पूर्व में हुए परमाणु परीक्षणों की वजह से किया गया है। यहां का मौसम और भू‑भाग ड्रोन उड़ान के लिए अनुकूल माना जाता है। आयोजन के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को पुरस्कृत किया जाएगा और उनके प्रोजेक्ट को आगे के विकास के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे पहले 2024 में ड्रोनाथॉन का पहला संस्करण बेंगलुरु में आयोजित हुआ था, जिसमें 120 से अधिक स्टार्टअप ने हिस्सा लिया था। उस आयोजन से कई प्रोटोटाइप सीधे सेना के परीक्षण चरण में पहुंचे। इस बार वायु सेना ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (NTRO) के साथ मिलकर एक संयुक्त मूल्यांकन पैनल बनाया है। पैनल हर ड्रोन की उड़ान क्षमता, संचार सुरक्षा और काउंटर‑मेजर को परखेगा। आयोजन के दौरान एक विशेष सत्र में सीमा सुरक्षा बल (BSF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के अधिकारी भी अपने ऑपरेशनल अनुभव साझा करेंगे। वे बताएंगे कि कैसे स्वदेशी ड्रोन सीमा निगरानी और आंतरिक सुरक्षा में मदद कर सकते हैं। वायु सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रोनाथॉन केवल प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जहां उद्योग, शिक्षा संस्थान और सेना मिलकर भविष्य की रणनीति तय करते हैं। इससे रक्षा खरीद में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेंगी। पोखरण के रेगिस्तानी इलाके में होने वाले लाइव फायर टेस्ट में ड्रोन को वास्तविक टारगेट पर हमला करते हुए दिखाया जाएगा। इससे सिस्टम की सटीकता और प्रतिक्रिया समय का सीधा आकलन होगा। आयोजन के अंतिम दिन विजेता टीमों को नकद पुरस्कार के साथ‑साथ रक्षा मंत्रालय की ओर से अनुबंध वार्ता का अवसर भी मिलेगा। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को सीधे आगे बढ़ाती है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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