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पूर्वी चंपारण में रेज्ड बेड तकनीक से मक्के की बंपर पैदावार, जलजमाव से मिली मुक्ति

7/9/2026, 12:25:00 am
पूर्वी चंपारण में रेज्ड बेड तकनीक से मक्के की बंपर पैदावार, जलजमाव से मिली मुक्ति
पूर्वी चंपारण के किसानों ने इस बार मक्का की खेती में रेज्ड बेड तकनीक अपनाई है। इस विधि में खेत की मिट्टी को ऊंचे बेड़ों में बांधकर बोआई की जाती है। पहले इस क्षेत्र में बारिश के बाद जलजमाव आम बात थी, जिससे फसल डूब जाती थी और पैदावार गिरती थी। रेज्ड बेड से पानी तेजी से निकल जाता है और जड़ों को हवा मिलती है। कृषि विभाग और स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को प्रशिक्षण दिया और बीज, खाद तथा सिंचाई की उन्नत तकनीक मुहैया कराई। किसानों ने इसे हाथोंहाथ अपनाया। पहले सीजन में ही परिणाम सामने आए। एक हेक्टेयर में औसतन 65 क्विंटल मक्का निकला, जबकि परंपरागत तरीके से 45 क्विंटल ही मिलता था। किसान रामकुमार सिंह बताते हैं, "पहले पानी भरने से फसल बर्बाद हो जाती थी, अब बेड़ों पर पानी नहीं ठहरता और पैदावार दोगुनी हो गई।" महिला किसान सुनीता देवी ने भी इस तकनीक से लाभ उठाया। उन्होंने अपने खेत में 20 बेड़े बनाए और इस बार 30 क्विंटल मक्का बेचकर अच्छी आमदनी कमाई। वैज्ञानिकों का कहना है कि रेज्ड बेड से मिट्टी की नमी संतुलित रहती है, खरपतवार कम उगते हैं और उर्वरक का उपयोग भी कम होता है। इससे लागत घटती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि रेज्ड बेड तकनीक जलवायु परिवर्तन के दौर में भी कारगर साबित हो रही है। अधिक तापमान और अनियमित बारिश के बावजूद फसल स्वस्थ रहती है। किसानों को अब बाजार में बेहतर दाम मिल रहे हैं क्योंकि मक्का की गुणवत्ता सुधरी है। स्थानीय मंडी में इस बार प्रति क्विंटल 1800 रुपये का भाव मिला, जो पिछले साल से 200 रुपये अधिक है। जिला प्रशासन अब इस मॉडल को पूरे चंपारण में फैलाने की योजना बना रहा है। अगले साल 500 हेक्टेयर में रेज्ड बेड पर मक्का बोने का लक्ष्य रखा गया है। समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)

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