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इथेनॉल नीति से चीनी के दाम में उछाल, 10 % उत्पादन ईंधन में जा रहा

21/8/2026, 5:39:19 am
इथेनॉल नीति से चीनी के दाम में उछाल, 10 % उत्पादन ईंधन में जा रहा
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भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम तेज़ी से बढ़ रहा है और इसका सीधा असर चीनी की कीमतों पर पड़ रहा है, क्योंकि गन्ने का बड़ा हिस्सा अब ईंधन बनाने में लगाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने 2025-26 चीनी वर्ष के लिए पेट्रोल में 20 फ़ीसदी इथेनॉल मिलाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसे पूरा करने के लिए चीनी मिलों को उत्पादन बढ़ाना पड़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलें गन्ने के रस का बड़ा भाग इथेनॉल संयंत्रों में भेज रही हैं, जिससे चीनी के लिए उपलब्ध गन्ना घट गया है। बीबीसी हिंदी की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष तीन अरब किलोग्राम चीनी इथेनॉल उत्पादन में खर्च हुई, जो एक रिकॉर्ड स्तर है। यह मात्रा देश के कुल चीनी उत्पादन का लगभग दस फ़ीसदी बैठती है, और इससे बाज़ार में चीनी की उपलब्धता सिकुड़ गई है। कम आपूर्ति के कारण खुदरा बाज़ार में चीनी के दाम पिछले छह महीनों में 5‑7 फ़ीसदी तक बढ़ चुके हैं, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ रहा है। किसानों को गन्ने का उचित मूल्य मिल रहा है क्योंकि इथेनॉल की मांग ने गन्ना खरीद को मज़बूत किया है, लेकिन चीनी मिलों के मुनाफ़े पर दबाव बढ़ गया है। उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर इथेनॉल का लक्ष्य और बढ़ाया गया तो चीनी की कमी और गहरा सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह चीनी भंडार, आयात और निर्यात नीति में लचीलापन लाकर आपूर्ति बनाए रखेगी, साथ ही इथेनॉल उत्पादन को भी प्रोत्साहित करेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऊर्जा सुरक्षा और कृषि आय के बीच संतुलन बनाना आगे की बड़ी चुनौती होगी, और इसके लिए पारदर्शी नीति तथा समय‑समय पर समीक्षा ज़रूरी है। आने वाले महीनों में मानसून की बारिश और गन्ना फसल की स्थिति भी चीनी आपूर्ति को तय करेगी, इसलिए बाज़ार नज़र रखे हुए है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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