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बिहार के दोन इलाके में उफ़नती नदी पार कर बेटे को स्कूल ले जाता पिता

13/8/2026, 4:15:44 pm
बिहार के दोन इलाके में उफ़नती नदी पार कर बेटे को स्कूल ले जाता पिता
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बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले का दोन इलाका नेपाल की सीमा और घने जंगलों के बीच बसा है। यहाँ करीब 70 हज़ार लोग रहते हैं और हर दिन बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझते हैं। सड़कें टूटी हुई हैं और नदी पर कोई पुल नहीं है। बरसात में नदी उफ़ान पर आ जाती है और गाँव वालों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। इसी इलाके के एक गाँव में रहने वाले रामकुमार यादव अपने बेटे राहुल को रोज़ स्कूल पहुँचाने के लिए नदी पार करते हैं। नदी का पानी कमर तक चढ़ा होता है और तेज़ बहाव में छोटी नाव भी डगमगाती है। रामकुमार कहते हैं, "पुल नहीं है, नाव भी टूटी हुई है, फिर भी बेटे को पढ़ाना ज़रूरी है।" स्कूल गाँव से लगभग तीन किलोमीटर दूर है। रास्ते में नदी के अलावा कीचड़ भरे रास्ते और जंगली जानवरों का डर भी रहता है। रामकुमार सुबह चार बजे उठकर नाव तैयार करते हैं, फिर बेटे को लेकर नदी पार करते हैं। वापसी में भी यही प्रक्रिया दोहराते हैं। स्थानीय प्रशासन ने कई बार पुल बनाने का वादा किया, लेकिन अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। ग्राम प्रधान ने बताया कि फंड की कमी और ज़मीन अधिग्रहण की दिक्कतों के कारण परियोजना अटकी हुई है। इस हालात का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और जो जाते हैं वे थक कर क्लास में ध्यान नहीं लगा पाते। शिक्षकों का कहना है कि नियमित उपस्थिति न होने से पढ़ाई का स्तर गिर रहा है। ग्रामीणों ने ज़िला प्रशासन और राज्य सरकार से जल्द पुल बनाने की माँग की है। उनका कहना है कि केवल एक पुल से हज़ारों ज़िंदगियाँ आसान हो जाएँगी। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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