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फ्रांस में वाइन उत्पादन 70 साल के निचले स्तर पर, भारत के लिए नया मौका

19/9/2026, 11:26:04 pm
फ्रांस में वाइन उत्पादन 70 साल के निचले स्तर पर, भारत के लिए नया मौका
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जलवायु परिवर्तन का असर अब फ्रांस की वाइन इंडस्ट्री पर साफ दिख रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इस साल गर्मी की लहर और लंबे सूखे के कारण बोर्डो, बर्गंडी और शैम्पेन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अंगूर की पैदावार 50 फ़ीसदी तक गिर सकती है। किसानों ने बताया कि खेतों में पानी की कमी और तापमान 40 डिग्री के पार जाने से अंगूर सूख रहे हैं। उत्पादन में इस बड़ी गिरावट से फ्रांस की वार्षिक वाइन सप्लाई 3.5 करोड़ हेक्टोलीटर से नीचे आ सकती है, जो 1950 के बाद का सबसे निचला स्तर होगा। यूरोप के बड़े आयातक देश — जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका — पहले से ही स्टॉक बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में तेजी का अनुमान है। भारत में पिछले दशक में वाइन उत्पादन धीरे‑धीरे बढ़ा है। नासिक, पुणे, बेंगलुरु और हिमाचल के कुछ इलाकों में किसान अब उन्नत किस्में और ड्रिप इरिगेशन अपना रहे हैं। सरकार ने बागवानी प्रोत्साहन योजना के तहत सिंचाई, सब्सिडी और प्रशिक्षण की व्यवस्था की है, जबकि निजी निवेशक भी नई वाइनरी लगा रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर फ्रांस की कमी लंबी खिंचती है तो भारतीय वाइन को यूरोप और अमेरिका के बाजारों में जगह बनाने का सही मौका मिलेगा। हालांकि चुनौतियाँ भी हैं — भारतीय अंगूर की किस्में अभी फ्रांसीसी शैली की तुलना में कम पहचानी जाती हैं और निर्यात लॉजिस्टिक्स महंगा है। फिर भी, जलवायु परिवर्तन ने वैश्विक वाइन मानचित्र को फिर से लिखना शुरू कर दिया है। भारत अगर गुणवत्ता, ब्रांडिंग और सप्लाई चेन पर ध्यान दे तो वह इस खाली स्थान का लाभ उठा सकता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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