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ग़ज़ा में 8000 लोग अब भी लापता, परिवार ढूंढ रहे जवाब

20/8/2026, 2:22:20 pm
ग़ज़ा में 8000 लोग अब भी लापता, परिवार ढूंढ रहे जवाब
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ग़ज़ा में संघर्ष विराम की घोषणा को दस महीने बीत चुके हैं, लेकिन हज़ारों परिवारों के लिए इंतज़ार खत्म नहीं हुआ। ग़ज़ा डिफ़ेंस एजेंसी के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक अब भी करीब 8000 फ़लस्तीनी लापता हैं। उनके परिजनों को न तो उनकी मौत की पुष्टि मिली है, न ही ज़िंदगी का कोई सबूत। हर रोज़ सुबह सैकड़ों लोग अस्पतालों, शरणार्थी शिविरों और मलबे के ढेरों के बीच अपनों को ढूंढते दिखते हैं। किसी के हाथ में फटी हुई तस्वीर होती है, किसी के पास बस आखिरी बार देखी गई जगह का पता। बहुत से परिवारों ने डीएनए जांच के लिए सैंपल दिए हैं, मगर नतीजे आने में महीने लग रहे हैं। ग़ज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लापता लोगों में बड़ी तादाद बच्चों और बुजुर्गों की है। कई मामलों में पूरा का पूरा परिवार ही गायब हो गया, पीछे कोई गवाह नहीं बचा। इज़राइल की ओर से जेलों में बंद फ़लस्तीनियों की सूची जारी की गई है, लेकिन उसमें भी हज़ारों नाम गायब हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्धरत पक्षों को लापता लोगों की जानकारी साझा करनी होती है। मगर ज़मीन पर हालात उलट हैं। रेड क्रॉस और संयुक्त राष्ट्र की टीमें भी सीमित पहुंच के चलते पूरी तस्वीर नहीं जुटा पा रही हैं। ख़ान यूनिस के एक शिविर में रहने वाली उम्म अहमद कहती हैं, "मेरे दो बेटे और पति पिछले अक्टूबर से लापता हैं। हर दिन मैं उन्हीं रास्तों पर जाती हूं जहां उन्हें आखिरी बार देखा गया था। बस एक खबर मिल जाए — ज़िंदा हैं या नहीं।" मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस अनिश्चितता का असर पूरी पीढ़ी पर पड़ेगा। बच्चे रातों को जागते हैं, बड़े अवसाद में डूब रहे हैं। जब तक लापता लोगों का हिसाब-किताब साफ नहीं होता, ग़ज़ा के घाव भर नहीं सकते।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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