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Gen-Alpha छात्राओं ने थाने में रखी अपनी मांगें: छिंदवाड़ा में छात्रावास का विरोध

15/8/2026, 12:59:43 am
Gen-Alpha छात्राओं ने थाने में रखी अपनी मांगें: छिंदवाड़ा में छात्रावास का विरोध
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मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की कन्या शिक्षा परिषद के एक छात्रावास में सोमवार को लगभग एक सौ पचास छात्राओं ने इकट्ठा होकर स्थानीय थाने का रुख किया। ये सभी जेन अल्फा आयु वर्ग, लगभग 8 से 14 साल की छात्राएं थीं, जो अपने छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं की कमी से परेशान थीं। उन्होंने मुख्य रूप से तीन मांगें रखीं: शौचालियों की नियमित सफाई और मरम्मत, सुरक्षित पेयजल के लिए फ़िल्टर सिस्टम की स्थापना, और छात्रावास के गलियारों और कमरों में पर्याप्त बिजली की व्यवस्था। छात्राओं ने कहा कि इन समस्याओं के कारण उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ रहा है। छात्राओं ने कहा कि वे अपनी समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से सामने लाना चाहती थीं ताकि कोई व्यवधान न पैदा हो। छात्राओं के प्रतिनिधि ने बताया कि पिछले दो महीनों से वे हॉस्टल प्रबंधन और विद्यालय प्रशासन को लिखित शिकायतें दे रहे थे, परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कई बार शौचालियों में पानी का रिसाव और गंदगी जमा हो जाती है, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। पेयजल की टंकियों में नियमित रूप से क्लोरीन नहीं डाला जाता, जिससे पानी की स्वच्छता संदेहास्पद रहती है। बिजली की कटौती रात को अक्सर होती है, जिससे पढ़ाई करने में कठिनाई होती है। इन समस्याओं के बावजूद प्रबंधन की ओर से केवल आश्वासन दिए गए, कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने बताया कि शिकायतों के जवाब में केवल एक सामान्य मेल भेजा गया, जिसमें कोई 구체िक समय सीमा नहीं बताई गई। थाने पहुंचने पर छात्राओं ने अपने आवेदन को लिखित रूप में पुलिस अधिकारी को सौंपा। थाने के प्रभारी ने कहा कि वह उनकी शिकायत को गंभीरता से ले रहे हैं और मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि हॉस्टल प्रबंधन को नोटिस भेजकर आवश्यक सुधारों की समय सीमा तय की जाएगी। स्थानीय शिक्षा अधिकारी, जो घटना के बाद मौके पर पहुंचे, ने बताया कि विभाग ने छात्रावास के सुधार के लिए बजट में पंद्रह लाख रुपये का प्रावधान किया है, जो आगामी तिमाही में खर्च किया जाएगा। उन्होंने वादा किया कि शौचालियों की टाइलिंग, नल‑जल पाइपलाइन की मरम्मत और सोलर पैनल लगाकर बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। शिक्षा अधिकारी ने आगे कहा कि काम की प्रगति की मासिक समीक्षा की जाएगी और समुदाय के प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इस घटना से स्पष्ट होता है कि जेन अल्फा भी अपने अधिकारों के लिए声 उठाने से नहीं हिचकिचाती। सामाजिक वैज्ञानिक डॉ॰ मेहरा ने कहा कि इस आयु वर्ग की सक्रिय भागीदारी पारंपरिक आंदोलनों के तरीकों में बदलाव ला सकती है, क्योंकि वे सोशल मीडिया और त्वरित संचार के माध्यम से अपने मुद्दों को तेज़ी से फैलाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी की इस सक्रियता से नीति निर्माताओं को नए दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा मिलती है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, कोई धक्का‑मुक्की या संपत्ति क्षति नहीं हुई। उन्होंने छात्राओं को बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने की सलाह दी और कहा कि भविष्य में इसी तरह की चिंताओं को समय‑पर प्रबंधन के सामने लाने के लिए एक नियमित संवाद मंच बनाया जाएगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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