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जेन‑ज़ी की ताकत से ब्यूटी बाजार में उछाल

21/8/2026, 7:30:44 am
जेन‑ज़ी की ताकत से ब्यूटी बाजार में उछाल
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भारत की जेन‑ज़ी पीढ़ी अब ब्यूटी बाजार की रफ़्तार बदल रही है। 18 से 25 साल के ये युवा न केवल नए ट्रेंड अपनाते हैं, बल्कि ब्रांड को अपनी पसंद के मुताबिक ढालने की ताकत भी रखते हैं। उनकी खरीदारी की आदतें परंपरागत विज्ञापन से ज्यादा सोशल मीडिया, रील्स और इन्फ्लुएंसर के सुझावों पर चलती हैं। ई‑कॉमर्स प्लेटफॉर्म और तेज़ डिलीवरी नेटवर्क ने छोटे शहरों तक भी प्रीमियम प्रोडक्ट पहुंचा दिए हैं। बढ़ती प्रति व्यक्ति आय के साथ युवा अब महंगे सीरम, ऑर्गेनिक फेस मास्क और क्रूएल्टी‑फ्री मेकअप खरीदने में नहीं हिचकते। नायका, मामाअर्थ और प्लम जैसे घरेलू ब्रांड इस मांग को पूरा करने के लिए नए फॉर्मूला लॉन्च कर रहे हैं। विदेशी लेबल भी भारत को अपना सबसे बड़ा ग्रोथ मार्केट मान रहे हैं। लॉरियल, एस्टी लॉडर और मैक जैसे नाम अब हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में कैंपेन चला रहे हैं। वे लोकल इन्फ्लुएंसर के साथ को‑लैब करते हैं ताकि सांस्कृतिक संदर्भ सही रहे। इससे ब्रांड की विश्वसनीयता बढ़ती है और युवा ग्राहक जल्दी जुड़ जाते हैं। हालिया सर्वे बताते हैं कि 18‑25 आयु वर्ग के उपभोक्ता हर महीने औसतन तीन से चार ब्यूटी प्रोडक्ट खरीदते हैं। इस रफ़्तार से बाजार का सालाना आकार 2025 तक 30 बिलियन डॉलर को पार कर सकता है। डेटा एनालिटिक्स और AI‑आधारित रिकमेंडेशन इंजन कंपनियों को व्यक्तिगत ऑफर बनाने में मदद कर रहे हैं, जिससे कन्वर्जन रेट और भी ऊपर जा रहा है। टिकाऊ पैकेजिंग और प्राकृतिक घटकों की मांग भी तेज़ी से बढ़ रही है। युवा खरीदार प्लास्टिक‑फ्री बोतल, रीसाइक्लेबल कंटेनर और क्रूएल्टी‑फ्री सर्टिफिकेट देखते ही निर्णय लेते हैं। कई स्टार्टअप अब बायोडिग्रेडेबल शीट मास्क और वॉटर‑लेस क्लींजर लॉन्च कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण के प्रति जागरूकता ब्रांड वैल्यू का हिस्सा बन गई है। कुल मिलाकर, जेन‑ज़ी की पसंद, डिजिटल पहुंच और बढ़ती आमदनी भारत के ब्यूटी उद्योग को वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर रही है। निवेशक भी इस सेक्टर में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और नए फंडिंग राउंड की घोषणा लगातार हो रही है। आने वाले वर्षों में यह रुझान और तेज़ होगा, क्योंकि युवा आबादी का अनुपात अभी और बढ़ेगा। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति और GST सरलीकरण से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बल मिला है, जिससे कीमतें प्रतिस्पर्धी रहेंगी और निर्यात क्षमता भी बढ़ेगी। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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