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ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड: दोषी दारा सिंह की रिहाई पर फिर चर्चा, ओडिशा सरकार करेगी फैसला

2/9/2026, 7:06:01 am
ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड: दोषी दारा सिंह की रिहाई पर फिर चर्चा, ओडिशा सरकार करेगी फैसला
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ओडिशा के क्योंझर जिले में 1999 की वह रात आज भी लोगों के ज़हन में ताज़ा है। ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों — टिमोथी (10) और फिलिप (6) — को उनकी ही गाड़ी में ज़िंदा जला दिया गया था। इस नृशंस हत्याकांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। 2003 में निचली अदालत ने बजरंग दल के तत्कालीन नेता दारा सिंह समेत 13 लोगों को दोषी ठहराया। दारा सिंह को फांसी की सज़ा सुनाई गई, जबकि बाकी को उम्रकैद मिली। 2005 में ओडिशा हाईकोर्ट ने दारा सिंह की फांसी को उम्रकैद में बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में इस फैसले पर मुहर लगा दी। अब करीब 24 साल जेल में बिताने के बाद दारा सिंह की समय-पूर्व रिहाई (प्रिमैच्योर रिलीज़) की अर्ज़ी पर ओडिशा सरकार विचार कर रही है। राज्य के गृह विभाग ने संबंधित ज़िला प्रशासन और पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। सुप्रीम कोर्ट के 2022 के एक फैसले के मुताबिक, उम्रकैद के दोषी 14 साल पूरे होने पर रिहाई की अर्ज़ी दे सकते हैं, बशर्ते अपराध 'दुर्लभतम' श्रेणी में न आता हो। ग्राहम स्टेन्स की पत्नी ग्लेडिस स्टेन्स और बेटी एस्थर ने हमेशा कहा है कि उन्होंने दोषियों को माफ कर दिया है। 2019 में ग्लेडिस को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। मगर मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समूहों का तर्क है कि यह अपराध 'दुर्लभतम' था और रिहाई गलत संदेश देगी। ओडिशा के गृह सचिव ने बताया कि दारा सिंह का जेल में आचरण अच्छा रहा है। मगर अंतिम फैसला राज्य सरकार की सज़ा पुनरीक्षण समिति लेगी, जिसमें गृह सचिव, डीजीपी और विधि सचिव शामिल होते हैं। समिति की सिफारिश पर राज्यपाल मुहर लगाएंगे। कानूनी जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम वी. श्रीहरन' मामले में साफ किया था कि 'दुर्लभतम' अपराधों में रिहाई नहीं होनी चाहिए। अब देखना है कि ओडिशा सरकार इस पैमाने को कैसे लागू करती है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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