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हज़ारीबाग़ के इस जोड़े का जज़्बा: संसाधनों की कमी और पेपर लीक के बावजूद सरकारी नौकरी की तैयारी जारी

14/8/2026, 2:48:10 pm
हज़ारीबाग़ के इस जोड़े का जज़्बा: संसाधनों की कमी और पेपर लीक के बावजूद सरकारी नौकरी की तैयारी जारी
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झारखंड के हज़ारीबाग़ जिले में रहने वाले रवि कुमार और उनकी पत्नी प्रीति देवी पिछले चार साल से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। दोनों ने ग्रेजुएशन के बाद से ही झारखंड लोक सेवा आयोग, बैंकिंग, रेलवे और एसएससी की परीक्षाएं दी हैं। रवि एक निजी कोचिंग में पढ़ाते हैं जिससे घर का खर्च चलता है, जबकि प्रीति घर संभालने के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखती हैं। संसाधनों की कमी उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा है। उनके पास लैपटॉप नहीं है, स्मार्टफोन पुराना है और इंटरनेट की स्पीड अक्सर धीमी रहती है। महंगी किताबें और टेस्ट सीरीज़ खरीदना उनके बजट से बाहर है। फिर भी दोनों ने हार नहीं मानी। रवि बताते हैं, "हम लाइब्रेरी जाते हैं, दोस्तों से नोट्स लेते हैं और यूट्यूब पर फ्री क्लास देखते हैं। जहां चाह, वहां राह।" पेपर लीक और भ्रष्टाचार ने उनका भरोसा कई बार तोड़ा है। पिछले साल झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की एक परीक्षा का पेपर लीक हुआ तो दोनों की मेहनत पर पानी फिर गया। प्रीति कहती हैं, "पेपर लीक होता है तो लगता है सब बेकार गया। लेकिन फिर सोचते हैं कि अगर हम छोड़ देंगे तो कौन लड़ेगा?" उनके परिवार ने पूरा साथ दिया है। रवि के पिता रिटायर्ड चौकीदार हैं, पेंशन से घर चलता है। उन्होंने दोनों की पढ़ाई के लिए अपनी बचत लगा दी। मां सुबह जल्दी उठकर खाना बनाती हैं ताकि दोनों वक्त पर पढ़ सकें। छोटा भाई अपनी कमाई का हिस्सा किताबों के लिए देता है। हज़ारीबाग़ में ऐसे सैकड़ों युवा हैं जो इसी जद्दोजहद में हैं। कोचिंग सेंटरों की फीस 50 हज़ार से एक लाख तक है, जो गरीब परिवारों की पहुंच से बाहर है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राजेश तिवारी कहते हैं, "सरकार को ग्रामीण इलाकों में फ्री कोचिंग और डिजिटल लाइब्रेरी खोलनी चाहिए। टैलेंट की कमी नहीं, मौकों की कमी है।" रवि और प्रीति अब अगले महीने होने वाली परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार नतीजा उनके पक्ष में होगा। रवि मुस्कुराते हुए कहते हैं, "नौकरी मिले न मिले, हमने हारना नहीं सीखा।" समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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