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हिमालय के ग्लेशियर पिघलने से 2 अरब लोगों पर खतरा, भारत में 56 झीलें खतरनाक

19/9/2026, 12:51:05 am
हिमालय के ग्लेशियर पिघलने से 2 अरब लोगों पर खतरा, भारत में 56 झीलें खतरनाक
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हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और इसका सीधा असर आठ एशियाई देशों के करीब दो अरब लोगों पर पड़ रहा है। एक नई वैज्ञानिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के हिमालयी क्षेत्र में 56 झीलें ऐसी हैं जिनमें पानी का स्तर अचानक बढ़ सकता है और अचानक बाढ़ का खतरा पैदा कर सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार ग्लेशियर के पिघलने से नदियों का प्रवाह अनियमित हो रहा है, जिससे सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और पनबिजली परियोजनाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, चीन, बांग्लादेश, म्यांमार और अफ़ग़ानिस्तान भी इस खतरे की चपेट में हैं क्योंकि ये सभी देश हिमालय से निकलने वाली नदियों पर निर्भर हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन की निगरानी बढ़ानी होगी और झीलों की स्थिति पर नज़र रखने के लिए सैटेलाइट आधारित तकनीक का व्यापक इस्तेमाल करना होगा। स्थानीय प्रशासन को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग देनी चाहिए ताकि अचानक बाढ़ आने पर लोग तेजी से सुरक्षित स्थान पर जा सकें। अगर समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दशकों में बड़ी बाढ़ और पानी की भारी कमी दोनों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होंगे। सरकारें, वैज्ञानिक संस्थान और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को मिलकर एक साझा योजना बनानी होगी ताकि हिमालयी ग्लेशियर की निगरानी और झीलों के जोखिम को कम किया जा सके। हाल ही में उत्तराखंड की चोराबारी झील और सिक्किम की गुरुडोंगमार झील में पानी का स्तर तेजी से बढ़ा था, जिससे आसपास के गांवों को खाली कराना पड़ा। इन घटनाओं ने वैज्ञानिकों को चेताया है कि झीलों के किनारे बसे बस्तियों के लिए नियमित निगरानी और जल निकासी प्रणाली अनिवार्य है। भारत सरकार ने ‘हिमालय ग्लेशियर मॉनिटरिंग प्रोग्राम’ शुरू किया है जिसके तहत ड्रोन और रडार से ग्लेशियर की मोटाई और झीलों के पानी के स्तर की रियल‑टाइम जानकारी ली जाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘हिंदुस्तान‑हिमालय जल सुरक्षा पहल’ के तहत आठों देश एक संयुक्त डेटा प्लेटफ़ॉर्म बनाने पर सहमत हुए हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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