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अति‑राजनीति ने दस साल में समाज को कैसे बदला? एंटोन जेगर का विश्लेषण

12/9/2026, 12:14:49 am
अति‑राजनीति ने दस साल में समाज को कैसे बदला? एंटोन जेगर का विश्लेषण
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इतिहासकार और लेखक एंटोन जेगर ने हाल ही में एक विस्तृत विश्लेषण जारी किया है जिसमें वे बताते हैं कि पिछले दस साल में अति‑राजनीति ने समाज के हर कोने में प्रवेश किया है। उनके अनुसार, सोशल मीडिया, 24‑घंटे समाचार चक्र और लगातार चुनावी अभियान ने नागरिकों को हर मुद्दे पर तुरंत राय बनाने के लिए मजबूर किया है। इस प्रक्रिया ने पारंपरिक संस्थाओं जैसे संसद, अदालत और विश्वविद्यालय को भी दबाव में ला दिया है, क्योंकि जनता अब हर निर्णय को राजनीतिक चश्मे से देखती है। जेगर बताते हैं कि अति‑राजनीति ने सामाजिक विश्वास को कम किया है; लोग एक‑दूसरे के इरादों पर शक करने लगे हैं और सहमति बनाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने उदाहरण दिया कि जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक सुधार जैसे मुद्दे अब केवल नीति नहीं, बल्कि पहचान की लड़ाई बन गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, नागरिक समाज के संगठन अपनी स्वतंत्रता खो रहे हैं और कई बार सरकारी दबाव में काम करने को मजबूर होते हैं। जेगर सुझाव देते हैं कि समाज को फिर से संवाद की जगह बनानी होगी, जहां तथ्यों पर आधारित चर्चा हो सके और राजनीतिक लेबल से ऊपर उठा जा सके। विश्लेषण में कहा गया है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और सामाजिक एकता दोनों को गंभीर खतरा हो सकता है। जेगर ने यह भी नोट किया कि युवा पीढ़ी, जो डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर पली‑बढ़ी है, राजनीतिक बहस को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा मानती है, जिससे उनकी नागरिक भागीदारी का स्वरूप बदल गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को आलोचनात्मक सोच और मीडिया साक्षरता पर जोर देना चाहिए ताकि नागरिक सूचना की बाढ़ में तथ्य और प्रचार को अलग कर सकें। अंत में, जेगर चेतावनी देते हैं कि अति‑राजनीति की लहर को रोकने के लिए संस्थागत सुधार, पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया और नागरिक समाज की स्वायत्तता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विश्लेषण से नीति‑निर्माताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि राजनीतिक ध्रुवीकरण केवल चुनावी नतीजों तक सीमित नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के संबंधों को भी आकार दे रहा है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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