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इमरान मसूद ने वंदे मातरम गाने से इनकार किया, इस्लाम का हवाला देकर

18/8/2026, 7:06:32 am
इमरान मसूद ने वंदे मातरम गाने से इनकार किया, इस्लाम का हवाला देकर
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स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सोनिया गांधी के निर्देश के बाद पूरा ‘वंदे मातरम’ गाने पर रोक लगाने की खबर सामने आई। इस पर संसद और राजनीतिक दलों में तीखी बहस शुरू हो गई। कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि वह इस्लाम की शिक्षाओं के चलते ‘वंदे मातरम’ नहीं गाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके मजहब में केवल अल्लाह की इबादत जायज है, इसलिए किसी भी तरह की वंदना उनके लिए मुनासिब नहीं। मसूद ने यह भी जोड़ा कि वे राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के तौर पर ‘वंदे मातरम’ का सम्मान करते हैं, लेकिन व्यक्तिगत आस्था उनके लिए प्राथमिक है। उन्होंने मांग की कि हर नागरिक को अपने धार्मिक विश्वास के मुताबिक फैसला लेने की आजादी होनी चाहिए। उनके बयान के बाद लोकसभा में कुछ सदस्यों ने धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर समर्थन किया, जबकि कई अन्य ने इसे राष्ट्रभावना का अपमान बताया। विपक्षी दलों ने कहा कि ऐसे मुद्दे सदन की कार्यवाही को भटका देते हैं। कांग्रेस के अंदर भी प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मसूद के अधिकार का समर्थन किया, वहीं पार्टी के दूसरे नेताओं ने कहा कि सार्वजनिक मंच पर राष्ट्रगान गाना एक संवैधानिक कर्तव्य है। पार्टी ने अभी तक कोई आधिकारिक रुख जारी नहीं किया है। संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता देता है, लेकिन अनुच्छेद 51ए नागरिक कर्तव्यों में राष्ट्रगान का सम्मान शामिल है। अदालतें पहले भी ऐसे टकराव पर संतुलन बनाने की बात कह चुकी हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ यूजर्स ने मसूद के साहस की सराहना की, तो कई ने इसे देशद्रोह की श्रेणी में रखा। मामला आगे भी संसद और मीडिया में चर्चा का विषय बना रह सकता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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