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जीडीपी की रफ्तार तेज, लेकिन जेब अब भी खाली? जानें आम आदमी के लिए क्या मायने

5/9/2026, 4:42:15 am
जीडीपी की रफ्तार तेज, लेकिन जेब अब भी खाली? जानें आम आदमी के लिए क्या मायने
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भारत की जीडीपी ग्रोथ की चर्चा जब भी होती है, आम आदमी सबसे पहले अपनी जेब टटोलता है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था 7-8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है। मगर रसोई का बजट, बच्चों की फीस और EMI चुकाने वाला आदमी पूछता है — मेरी कमाई कहां बढ़ी? बीबीसी हिंदी के कार्यक्रम 'द लेंस' में इसी सवाल पर अर्थशास्त्रियों और जानकारों ने चर्चा की। उनका कहना है कि जीडीपी का आंकड़ा औसत निकालता है। अमीरों की संपत्ति तेजी से बढ़ी है, लेकिन निचले तबके की आमदनी लगभग स्थिर है। असमानता का यह अंतर आंकड़ों में छिप जाता है। निजी खपत, जो जीडीपी का लगभग 60 फीसदी हिस्सा है, उसकी रफ्तार सुस्त है। ग्रामीण इलाकों में मजदूरी की दरें ज्यादा नहीं बढ़ीं। मनरेगा में काम मांगने वालों की संख्या अब भी ऊंची बनी हुई है। ये संकेत बताते हैं कि जमीनी स्तर पर मांग कमजोर है। दूसरी तरफ, कॉरपोरेट मुनाफे रिकॉर्ड स्तर पर हैं। शेयर बाजार नई ऊंचाइयां छू रहा है। लेकिन संगठित क्षेत्र में रोजगार सृजन उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ। छोटे कारोबारी और असंगठित क्षेत्र अब भी नोटबंदी, GST और कोरोना के झटकों से उबर रहे हैं। विशेषज्ञ सुझाते हैं कि ग्रोथ का फायदा नीचे तक पहुंचे, इसके लिए खेती-किसानी में निवेश, ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर और हुनर विकास पर जोर देना होगा। सिर्फ आंकड़ों की चमक से पेट नहीं भरता। नीति निर्माताओं को यह फासला पाटने पर ध्यान देना होगा। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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