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ट्रंप के 'इकोनॉमिक डी-डे' पर ईरान की काट, भारत भी चिंतित

31/8/2026, 7:52:24 am
ट्रंप के 'इकोनॉमिक डी-डे' पर ईरान की काट, भारत भी चिंतित
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अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंधों का ऐलान किया है। व्हाइट हाउस इसे 'इकोनॉमिक डी-डे' बता रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ये पाबंदियाँ ईरान की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला देंगी। लेकिन तेहरान में बैठे नेता चुप नहीं हैं। उन्होंने बचाव की रणनीति तैयार कर ली है। नए प्रतिबंध ईरान के तेल निर्यात, बैंकिंग सेक्टर और शिपिंग उद्योग को निशाना बनाते हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान का तेल निर्यात शून्य हो जाए। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए पैसा नहीं मिलेगा। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने जवाब में कहा कि अमेरिका की धमकियाँ बेअसर रहेंगी। उन्होंने यूरोपीय देशों से अपील की है कि वे परमाणु समझौते को बचाएँ। विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ चीन, रूस और भारत जैसे देशों के संपर्क में हैं। ईरान की रणनीति है — तेल बेचने के नए रास्ते खोजना, वस्तु विनिमय करना और घरेलू उत्पादन बढ़ाना। भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। भारत ईरान से कच्चा तेल खरीदता रहा है। चाबहार बंदरगाह परियोजना में भी भारत का बड़ा निवेश है। प्रतिबंधों के चलते भारतीय रिफाइनरियों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ रहे हैं। सरकार ने कहा है कि वह राष्ट्रीय हित में फैसला लेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव दिख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर ईरान का तेल पूरी तरह बाजार से बाहर हुआ तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल पार कर सकती हैं। सऊदी अरब और रूस ने उत्पादन बढ़ाने के संकेत दिए हैं। यूरोपीय संघ ने प्रतिबंधों का विरोध किया है। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) बनाने की बात कही है ताकि ईरान के साथ व्यापार जारी रहे। लेकिन कई बड़ी यूरोपीय कंपनियाँ पहले ही ईरान से निकल चुकी हैं। ईरान की घरेलू हालत खराब है। मुद्रा रियाल की कीमत गिरी है। महंगाई बढ़ी है। लेकिन ईरानी नेतृत्व का दावा है कि उन्होंने 'प्रतिरोध अर्थव्यवस्था' तैयार की है। अगले कुछ महीने बताएँगे कि ट्रंप का दांव काम करता है या ईरान की काट सफल होती है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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