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राहुल गांधी पर एफआईआर, शुद्धीकरण विवाद में कांग्रेस का आरोप

31/8/2026, 7:24:04 am
राहुल गांधी पर एफआईआर, शुद्धीकरण विवाद में कांग्रेस का आरोप
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कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि शुद्धीकरण कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया, जबकि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पार्टी का कहना है कि यह भाजपा का दलित विरोधी चेहरा दिखाता है और कानून का चुनिंदा इस्तेमाल हो रहा है। घटना उत्तर प्रदेश के एक ग्रामीण इलाके में हुई जहां कुछ स्थानीय नेताओं ने दलित समुदाय के सदस्यों का शुद्धीकरण कराया था। इस कार्यक्रम के बाद पुलिस ने राहुल गांधी के नाम पर एफआईआर दर्ज की, जिसमें उन पर भड़काऊ भाषण देने और शांति भंग करने का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और कहा कि राहुल गांधी केवल पीड़ितों के पक्ष में बोल रहे थे। भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत मिलने पर पुलिस कार्रवाई करती है, चाहे वह किसी भी दल का हो। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि शुद्धीकरण कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है, इसलिए कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। सामाजिक कार्यकर्ताओं और दलित संगठनों ने इस मामले को दलित अधिकारों के लिए खतरा बताया। उन्होंने मांग की कि शुद्धीकरण कराने वालों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हो और पुलिस निष्पक्ष जांच करे। कई संगठनों ने धरना प्रदर्शन की घोषणा की है और वे सरकार से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं। इस विवाद ने संसद में भी चर्चा छेड़ दी। विपक्षी सांसदों ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा और कहा कि चुनिंदा कार्रवाई से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। सत्ताधारी दल ने मामले को न्यायिक प्रक्रिया पर छोड़ने की बात कही और कहा कि अदालत ही तय करेगी कि कौन दोषी है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं। अदालत में सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन मामला राष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस मामले पर बयान जारी किया और कहा कि कानून सभी के लिए समान है। मुख्यमंत्री ने पुलिस को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए और आश्वासन दिया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी के समर्थन में बयान जारी किए और कहा कि यह मामला दलित उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश है। उन्होंने देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी अगर न्याय नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश ने भी इस पर टिप्पणी की और कहा कि चुनिंदा एफआईआर दर्ज करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने न्यायपालिका से स्वतंत्र जांच की मांग की। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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