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ईरान-यूएई रिश्ते सुधारने पर जोर, पेजेश्कियान बोले- पुरानी बातें भूलें; भारत की अहम भूमिका
13/9/2026, 4:24:29 am

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ रिश्ते सुधारने पर जोर दिया है। तेहरान में एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों मुल्कों को पुरानी बातें पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। पेजेश्कियान ने साफ शब्दों में कहा कि पड़ोसियों से तनाव किसी के हक में नहीं है।
ईरान और यूएई के बीच बरसों से कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। अबू मूसा, ग्रेटर टुनब और लेसर टुनब द्वीपों पर मालिकाना हक को लेकर विवाद पुराना है। इसके अलावा खाड़ी में सुरक्षा व्यवस्था और व्यापारिक रास्तों को लेकर भी दोनों देश आमने-सामने रहे हैं। पिछले कुछ सालों में राजनयिक स्तर पर बातचीत लगभग बंद सी थी।
पेजेश्कियान की इस पहल को क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। जानकार मानते हैं कि ईरान आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते पड़ोसियों से रिश्ते सुधारना चाहता है। यूएई खाड़ी का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र है। दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ने से ईरान की अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारत ने खाड़ी देशों और ईरान, दोनों से संतुलित रिश्ते बनाए रखे हैं। चाबहार पोर्ट परियोजना में भारत की भागीदारी ईरान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। वहीं यूएई भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। नई दिल्ली ने पर्दे के पीछे दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में मदद की है।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक भारतीय राजनयिकों ने तेहरान और अबू धाबी में कई दौर की अनौपचारिक बातचीत कराई। भारत का जोर हमेशा से क्षेत्रीय स्थिरता और संवाद पर रहा है। पेजेश्कियान के बयान के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्वागत करते हुए कहा कि खाड़ी में शांति पूरे क्षेत्र के हित में है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान-यूएई संबंध सुधरने से खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और ईरान के बीच भी तनाव कम हो सकता है। सऊदी अरब और ईरान के रिश्ते पहले से बेहतर हो रहे हैं। ऐसे में यूएई-ईरान वार्ता क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक और कड़ी साबित हो सकती है।
हालांकि चुनौतियां कम नहीं हैं। द्वीप विवाद, सुरक्षा चिंताएं और बाहरी ताकतों का प्रभाव अभी भी रोड़ा बन सकते हैं। लेकिन पेजेश्कियान का रुख सकारात्मक संकेत देता है। अगले कुछ हफ्तों में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात संभावित है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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