लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

इसरो अध्ययन: हिमालय में 676 ग्लेशियर झीलें बढ़ीं, 130 भारत में, खतरा बरकरार

29/8/2026, 12:47:14 am
इसरो अध्ययन: हिमालय में 676 ग्लेशियर झीलें बढ़ीं, 130 भारत में, खतरा बरकरार
Original publisher image
इसरो ने अपने सैटेलाइट डेटा से हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर झीलों की संख्या में तेज वृद्धि दर्ज की है। अध्ययन में कार्टोसैट‑2, रिसोर्ससैट‑2 और सेंटिनल‑1 के रडार चित्रों का उपयोग किया गया है। पिछले बीस वर्षों (2000‑2020) में कुल 676 नई झीलें बनी हैं, जिनमें से 130 भारत की सीमा के अंदर हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान बढ़ने और ग्लेशियर पिघलने से ये झीलें तेजी से फैल रही हैं। झीलों का आकार बढ़ने से नीचे के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, खासकर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में। इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. के. सिंह ने बताया कि सैटेलाइट इमेजरी से झीलों की निगरानी लगातार की जा रही है और खतरे की चेतावनी समय पर जारी की जाती है। अध्ययन में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की आशंका वाले 45 संवेदनशील स्थलों की पहचान की गई है। स्थानीय प्रशासन को आपदा प्रबंधन योजना अद्यतन करने, जल निकासी मार्गों की निगरानी बढ़ाने और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए ग्लेशियर संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन घटाने और वन आवरण बढ़ाने पर जोर देना होगा। इस अध्ययन से नीति निर्माताओं को हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आधार मिला है। केंद्र सरकार ने हिमालय राज्यों के साथ मिलकर एक संयुक्त निगरानी नेटवर्क बनाने की घोषणा की है। वैज्ञानिकों ने पाया कि 2000 के बाद से झीलों का औसत क्षेत्रफल प्रति वर्ष 1.2 प्रतिशत बढ़ा है, जो जल संसाधनों पर दबाव डाल रहा है। हिमाचल प्रदेश में बिजली परियोजनाओं के लिए जल भंडारण प्रभावित हो रहा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ सकती है। उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में पेयजल स्रोत सूख रहे हैं, जबकि झीलों का विस्तार भूमि कटाव को तेज कर रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हिमालयी ग्लेशियर डेटा साझा करने और संयुक्त शोध कार्यक्रम शुरू करने का आग्रह किया है। आगामी इसरो मिशन ‘निसार’ और ‘गगनयान’ के सेंसर से झीलों की रियल‑टाइम निगरानी संभव होगी। नागरिकों को भी जागरूक रहने, अधिकारियों की चेतावनियों का पालन करने और आपातकालीन किट तैयार रखने की अपील की गई है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित