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जाति जनगणना: क्या राजनीतिक दल वाकई गंभीर हैं?

28/8/2026, 12:56:12 pm
जाति जनगणना: क्या राजनीतिक दल वाकई गंभीर हैं?
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जाति जनगणना को लेकर राजनीतिक दलों की गंभीरता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों इस मुद्दे पर अलग‑अलग राय रखते हैं, जिससे आम जनता में भ्रम बढ़ रहा है। जनगणना के लिए तैयार 40 सवालों में जाति का जिक्र केवल एक बार किया गया है। यह एकल प्रश्न अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य जाति श्रेणियों को एक साथ समेटता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक जाति का ब्यौरा व्यापक स्तर पर नहीं लिया जाएगा, नतीजे 2011 की तरह अधूरे रह सकते हैं। पिछली जनगणना में जाति आंकड़े पूरे नहीं मिले थे, जिससे नीति निर्माण में बड़ी बाधा आई। कई राज्यों ने अपने स्तर पर जाति सर्वे शुरू किए हैं, लेकिन केंद्र की ओर से स्पष्ट दिशा नहीं मिली है। इस असमंजस के कारण राज्य सरकारें अपने‑अपने तरीके से डेटा जुटा रही हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर तुलना मुश्किल हो रही है। विपक्षी दल इसे चुनावी मुद्दा बना रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल आंकड़ों को राजनीति से दूर रखने की बात करता है। दोनों पक्ष अपने‑अपने वोट बैंक को ध्यान में रखकर बयान दे रहे हैं, जिससे नीति निर्धारण प्रभावित हो रहा है। सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि हर घर में जाति पूछी जाए, ताकि आरक्षण और कल्याण योजनाओं का सही आकलन हो सके। उनका तर्क है कि बिना विस्तृत जाति डेटा के सामाजिक न्याय की दिशा में कोई ठोस कदम उठाना असंभव है। सरकार ने अभी तक नई जनगणना की तारीख घोषित नहीं की है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक तैयारियां चल रही हैं, लेकिन राजनीतिक सहमति न होने से देरी हो रही है। जानकार मानते हैं कि बिना पूर्ण जाति डेटा के सामाजिक न्याय की दिशा में कदम उठाना मुश्किल होगा। इसलिए संसद और राज्य विधानसभाओं को मिलकर एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार करनी होगी, ताकि जनगणना का उद्देश्य पूरा हो सके। समाज के विभिन्न वर्ग इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं, जिससे सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। मीडिया भी लगातार रिपोर्ट कर रहा है कि जाति आधारित आंकड़ों की कमी विकास योजनाओं को प्रभावित कर रही है। अंत में, यह देखना होगा कि सरकार और विपक्ष मिलकर जाति जनगणना को लेकर कोई ठोस सहमति बना पाते हैं या नहीं। तभी देश को सही नीतिगत दिशा मिल सकेगी और सामाजिक न्याय का लक्ष्य पूरा हो सकेगा। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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