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जापान की पहली पसंद भारत, पर कारखाने थाईलैंड में ज्यादा — क्या है असली रणनीति?

24/8/2026, 12:40:11 am
जापान की पहली पसंद भारत, पर कारखाने थाईलैंड में ज्यादा — क्या है असली रणनीति?
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जापान की बड़ी कंपनियाँ जब निवेश की बात करती हैं, तो भारत उनका पहला नाम होता है। बड़ा बाज़ार, युवा कार्यबल और सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इन्सेंटिव (पीएलआई) योजनाएँ उन्हें आकर्षित करती हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के हालिया जापान दौरे में भी यही बात दोहराई गई — जापानी सीईओ भारत को रणनीतिक साझेदार बताते हैं। मगर हक़ीक़त कुछ और है। आँकड़े बताते हैं कि जापान के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स की संख्या थाईलैंड में भारत से कहीं अधिक है। ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल सेक्टर में थाईलैंड का औद्योगिक ढांचा दशकों से जमा हुआ है। वहाँ बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन इतनी सुगम हैं कि कंपनियाँ नया कारखाना लगाने में हिचकिचाती नहीं। भारत ने पिछले तीन-चार साल में कई सुधार किए — कॉर्पोरेट टैक्स घटाया, श्रम क़ानून सरल किए, सिंगल-विंडो क्लियरेंस शुरू की। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए पीएलआई स्कीम लाई गई। फिर भी ज़मीन अधिग्रहण, राज्यों के अलग-अलग नियम और इन्फ्रास्ट्रक्चर की गति अब भी चुनौती बनी हुई है। जापानी रणनीति ‘चीन प्लस वन’ की है। वे अपना जोखिम बाँटना चाहते हैं। थाईलैंड पहले से भरोसेमंद बेस है, भारत भविष्य का बड़ा बाज़ार। इसलिए वे दोनों जगह पैर जमाए रखते हैं — थाईलैंड में उत्पादन, भारत में विस्तार। पीयूष गोयल ने जापानी निवेशकों से कहा कि भारत अब ‘नीति नहीं, कार्यान्वयन’ पर ध्यान दे रहा है। राज्यों के साथ मिलकर लैंड बैंक बनाए जा रहे हैं। ग्रीनफ़ील्ड प्रोजेक्ट्स के लिए फ़ास्ट-ट्रैक मंज़ूरी का वादा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले पाँच साल में तस्वीर बदलेगी। जैसे-जैसे भारत का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मज़बूत होगा, जापानी कारखाने यहाँ भी बढ़ेंगे। तब भारत सही मायने में जापान की पहली पसंद बन सकेगा। जापान-भारत व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) पहले से ही टैरिफ कम कर रहा है। इससे कलपुर्ज़ा और मशीनरी आयात सस्ता हुआ है। भारत का गति शक्ति कार्यक्रम सड़क, रेल और बंदरगाह को जोड़ रहा है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत 10-15 फ़ीसदी तक घट सकती है। थाईलैंड का पूर्वी आर्थिक गलियारा (ईईसी) पहले से ही जापानी ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर का केंद्र है। वहाँ कुशल श्रम और तैयार सप्लाई चेन मौजूद है। दोनों देशों के बीच रक्षा और तकनीक सहयोग भी बढ़ रहा है। इससे जापानी कंपनियों को भारत में उच्च-मूल्य वाले उत्पाद बनाने का प्रोत्साहन मिलता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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