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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के बयान पर जावेद अख़्तर का तंज़

16/8/2026, 4:07:00 am
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के बयान पर जावेद अख़्तर का तंज़
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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने हाल ही में इस्लामाबाद में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह में हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर एक बयान दिया।\n\nउन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय देश की आर्थिक और सांस्कृतिक तरक्की में बराबर का भागीदार है और सरकार उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।\n\nराष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि हाल के वर्षों में अल्पसंख्यक सुरक्षा के लिए कई कानूनी कदम उठाए गए हैं।\n\nइस बयान के तुरंत बाद मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख़्तर ने अपने ट्विटर हैंडल पर तीखा व्यंग्य किया।\n\nअख़्तर ने लिखा कि ऐसी बातें केवल मीडिया के सामने दिखावे के लिए कही जाती हैं जबकि ज़मीनी हक़ीक़त बिल्कुल अलग है।\n\nउन्होंने सवाल उठाया कि जब तक हिंदू परिवारों को धमकियाँ, जबरन धर्मांतरण और संपत्ति हड़पने की घटनाएँ नहीं रुकतीं, शब्दों का कोई अर्थ नहीं रहता।\n\nपाकिस्तान के कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है।\n\nकुछ कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के बयान को एक सकारात्मक संकेत माना और कहा कि यह अल्पसंख्यक अधिकारों पर चर्चा की शुरुआत कर सकता है।\n\nदूसरी ओर कई विश्लेषकों ने इसे राजनीतिक दिखावा करार दिया और याद दिलाया कि पिछले दशक में अल्पसंख्यक विरोधी हिंसा की घटनाएँ बढ़ी हैं।\n\nपाकिस्तान की जनगणना के अनुसार हिंदू आबादी कुल जनसंख्या का लगभग दो प्रतिशत है, फिर भी वे शिक्षा, रोजगार और न्याय तक पहुँच में पीछे रह जाते हैं।\n\nविशेषज्ञों का मानना है कि केवल बयानबाजी से हालात नहीं सुधरेंगे, बल्कि ठोस नीतियाँ, स्वतंत्र न्यायपालिका और पुलिस सुधार की आवश्यकता है।\n\nभारत में भी इस मुद्दे पर मीडिया और नागरिक समाज में चर्चा तेज हुई है, क्योंकि दोनों देशों के अल्पसंख्यक अधिकारों की तुलना अक्सर की जाती है।\n\nपाकिस्तान के संविधान में अल्पसंख्यक अधिकारों की गारंटी है, लेकिन कार्यान्वयन में बड़े अंतर देखे गए हैं।\n\nअंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी पाकिस्तान से अल्पसंख्यक सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।\n\nइस बीच पाकिस्तानी संसद में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए नए विधेयक पर चर्चा चल रही है।\n\nविशेषज्ञ कहते हैं कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना कोई भी कानून प्रभावी नहीं होगा।\n\nसमाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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