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लालू पर जदयू का आरोप: फरक्का समझौते में बिहार का हक़ छोड़ा, जेल के डर से

24/8/2026, 12:00:00 am
लालू पर जदयू का आरोप: फरक्का समझौते में बिहार का हक़ छोड़ा, जेल के डर से
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर लालू प्रसाद यादव का नाम सुर्खियों में है। जनता दल (यूनाइटेड) ने आरोप लगाया है कि 1996 के फरक्का बैराज समझौते में लालू ने बिहार के जलाधिकार को कमजोर किया। जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि उस वक्त लालू मुख्यमंत्री थे और उन पर चारा घोटाला समेत कई मुकदमे चल रहे थे। जेल जाने के डर से उन्होंने केंद्र के दबाव में आकर समझौते पर दस्तखत किए। पार्टी का दावा है कि समझौते के तहत बिहार को गंगा नदी का अधिक पानी मिलना था, लेकिन लालू ने अपनी राजनीतिक सुरक्षा के लिए इस हक़ को छोड़ दिया। जदयू ने इसे "बिहार के साथ विश्वासघात" बताया और मांग की कि मामले की फिर से जांच हो। पार्टी ने यह भी कहा कि समझौते की शर्तें बाद में पश्चिम बंगाल के पक्ष में झुकी रहीं, जिससे बिहार के किसानों को सिंचाई के लिए पानी कम मिला। उधर, राष्ट्रीय जनता दल ने आरोपों को बेबुनियाद बताया। राजद के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि फरक्का समझौता राष्ट्रीय हित में था और लालू ने बिहार के किसानों के लिए बेहतर शर्तें हासिल की थीं। उन्होंने जदयू पर राजनीतिक लाभ के लिए पुराने मामले को उछालने का आरोप लगाया और कहा कि लालू ने कभी भी बिहार के हितों से समझौता नहीं किया। विशेषज्ञों का मानना है कि फरक्का बैराज का पानी बंटवारा आज भी बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच तनाव का विषय है। जल संसाधन विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह ने बताया कि यदि समझौते की शर्तों में बदलाव होता है तो उत्तर बिहार के किसानों को सीधा लाभ मिल सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी पुनर्विचार के लिए केंद्र, बिहार और पश्चिम बंगाल की सहमति जरूरी है। इस बीच, बिहार विधानसभा में विपक्ष ने मामले को लेकर हंगामा किया और सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार जल संसाधन के मुद्दे पर गंभीर है और सभी पहलुओं की जांच कराएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फरक्का समझौते की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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