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कश्मीर: सर्वानंद कौल हत्याकांड की फाइल 36 साल बाद खुली, इंसाफ की उम्मीद जगी

23/8/2026, 2:02:29 pm
कश्मीर: सर्वानंद कौल हत्याकांड की फाइल 36 साल बाद खुली, इंसाफ की उम्मीद जगी
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श्रीनगर। 29 अप्रैल 1990 की वह रात कश्मीर की तारीख में एक काले अध्याय की तरह दर्ज है। अनंतनाग जिले के सोपोर इलाके में नकाबपोश बंदूकधारियों ने सर्वानंद कौल 'प्रेमी' और उनके बेटे वीरेंद्र कौल को घर से अगवा कर लिया था। दोनों की गोलियों से छलनी लाशें अगले दिन मिलीं। कौल साहब सिर्फ एक शिक्षक नहीं थे — वे कश्मीरी भाषा के प्रख्यात कवि, समाजसेवी और सांप्रदायिक सौहार्द की जीती-जागती मिसाल थे। उस दौर में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हिंसा चरम पर थी। हजारों परिवार घाटी छोड़कर भागने को मजबूर हुए। लेकिन कौल साहब ने पड़ोसियों को छोड़कर जाने से इनकार कर दिया था। उनके एक पुराने बयान के मुताबिक, "मुस्लिम पड़ोसियों को छोड़ना बुज़दिली होगी।" यही जज्बा उनकी जान का दुश्मन बना। 36 साल तक यह केस ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। न कोई गिरफ्तारी, न चार्जशीट, न इंसाफ। परिवार और समाज लगातार आवाज उठाते रहे। अब जाकर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फाइल दोबारा खोली है। एसआईटी गठित की गई है। गवाहों के बयान फिर से दर्ज हो रहे हैं। पुराने सबूतों की फोरेंसिक जांच हो रही है। कौल साहब की बेटी और वीरेंद्र की बहन ने कहा, "पापा कहा करते थे — सच कभी मरता नहीं। आज उनकी बात सच होती दिख रही है।" मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही चेताया है कि देरी से सबूत मिट चुके होंगे, गवाह नहीं मिलेंगे। यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, पूरी कश्मीरी पंडित बिरादरी के जख्मों का हिस्सा है। अगर इस बार इंसाफ मिला, तो वह उन हजारों बेगुनाहों के लिए भी एक संदेश होगा जिनकी आवाज 90 के दशक में दबा दी गई थी। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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