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महाराष्ट्र की सरकारी बिजली कंपनियों का निजीकरण नहीं, महावितरण ला सकती है आईपीओ

9/9/2026, 7:52:58 pm
महाराष्ट्र की सरकारी बिजली कंपनियों का निजीकरण नहीं, महावितरण ला सकती है आईपीओ
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महाराष्ट्र सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य की सरकारी बिजली कंपनियों का निजीकरण नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि महावितरण (MSEDCL) और महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी (MSPGCL) समेत सभी बड़े उपक्रम सार्वजनिक क्षेत्र में ही रहेंगे। उन्होंने बताया कि बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए निजी पूंजी लाने की बात चल रही थी, लेकिन जनहित और सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने फैसला बदला है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि महावितरण जल्द ही अपना आरंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) ला सकती है। इस कदम से कंपनी को पूंजी जुटाने और नेटवर्क को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। आईपीओ की योजना अभी शुरुआती चरण में है और इसके लिए नियामक मंजूरियों का इंतजार है। फडणवीस ने कहा कि शेयर बिक्री का मकसद केवल वित्तीय मजबूती है, न कि नियंत्रण बदलना। विपक्षी दलों ने इस घोषणा का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही मांग की है कि बिजली दरों में पारदर्शिता बनी रहे। ऊर्जा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि उपभोक्ताओं के हित सर्वोपरि रहेंगे। राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और पुराने ट्रांसमिशन नेटवर्क पर दबाव है। नई पूंजी से ग्रिड को मजबूत करने और नवीकरणीय ऊर्जा को जोड़ने की योजना है। अधिकारियों के मुताबिक अगले वित्त वर्ष के अंत तक आईपीओ दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं। तब तक कंपनी मौजूदा ढांचे में ही काम करती रहेगी। इस फैसले से महाराष्ट्र के लाखों उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को राहत मिली है, क्योंकि निजीकरण की आशंका से नौकरियों और दरों पर असर पड़ने की चिंता थी। सरकार ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी बिजली क्षेत्र में सार्वजनिक स्वामित्व बना रहेगा, जबकि पूंजी बाजार का उपयोग केवल विकास के लिए किया जाएगा। पिछले साल केंद्र ने बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण का प्रस्ताव रखा था, लेकिन राज्यों के विरोध के बाद उसे वापस ले लिया गया। महाराष्ट्र ने उस समय भी स्पष्ट किया था कि वह अपने उपक्रमों को सार्वजनिक रखेगा। अब आईपीओ के जरिए जुटाई गई राशि का उपयोग स्मार्ट मीटर लगाने, लाइन लॉस कम करने और सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने में किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्वामित्व के साथ बाजार से पूंजी लेना एक संतुलित रास्ता है, बशर्ते पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बिजली क्षेत्र के सुधारों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करेगी, जिसमें उपभोक्ता प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इस बीच, कर्मचारी यूनियनों ने आईपीओ की शर्तों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई है, ताकि सेवा शर्तें प्रभावित न हों। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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