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बुध की सतह पर मिले कांच के मोतियों ने खोला पुराना ज्वालामुखी राज
12/9/2026, 2:08:03 am

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बुध, सूर्य के सबसे निकट का ग्रह, लंबे समय से वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित करता रहा है. उसकी चमकीली सतह पर हाल के अंतरिक्ष यानों ने छोटे‑छोटे कांच के मोतिये देखे हैं, जो सूर्य की रोशनी में चमकते दिखाई देते हैं. इन मोतियों का आकार रेत के दाने जैसा होता है और वे सतह पर बिखरे पड़े हैं.
प्रारंभिक विश्लेषण से पता चला कि ये मोतिये 대부분 सिलिका (सिलिकन डायऑक्साइड) से बने होते हैं. पहले Scientists ने सोचा कि ये केवल उल्कापिंड टक्कर से उत्पन्न हुए हैं, जब उच्च velocidad से आने वाला पत्थर सतह को पिघला दे और तेज़ी से ठंडा होकर कांच के गोले बन जाए.
हालिया शोध बताते हैं कि उल्कापिंड टकराव के अलावा, बुध के अंदर से निकलने वाला मैग्मा भी इन कांच के मोतियों का स्रोत हो सकता है. जब मैग्मा सतह तक पहुंचता है, तो वह आसपास की चट्टानों को 1,500 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान तक गर्म कर देता है, जिससे सिलिका पिघल जाती है.
इस पिघली हुई सिलिका जब तुरंत ठंडी होती है, तो वह तेज़ी से crystallize नहीं होती बल्कि amorphous glass के रूप में solid हो जाती है. इस प्रक्रिया को quenching कहा जाता है और यह धरती पर ज्वालामुखी विस्फोट से बनने वाले obsidian (ज्वालामुखी कांच) के समान है.
यदि बुध पर वास्तव में पुराने ज्वालामुखी विस्फोट हुए हों, तो उसकी सतह पर मौजूद silicon dioxide की मात्रा और उसके आइसोटोपिक अनुपात में विशिष्ट पैटर्न दिखना चाहिए. ज्वालामुखी कांच में oxygen के isotopes का अनुपात तापमान और दबाव की विशेष निशानी छोड़ता है, जिसे सटीक स्पेक्ट्रोमीटरी से मापा जा सकता है.
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और जापान अंतरिक्ष अन्वेषण एजेंसी (JAXA) की संयुक्त बीपीकोलंबो मिशन इस परीक्षण को अंजाम देने के लिए तैयार है. मिशन के दो परिक्रमा यान — MPO (Mercury Planetary Orbiter) और Mio (Mercury Magnetospheric Orbiter) — बुध की चारों ओर घूमकर उसकी सतह की रासायनिक संरचना, खनिज संगठन और तापमान वितरण को मापेंगे.
MPO में लगे उच्च‑रिज़ॉल्यूशन स्पेक्ट्रोमीटर सतह पर मौजूद silicon dioxide की सान्द्रता को parts per million स्तर तक बताएंगे, जबकि थर्मल इमेजर्स सतह के तापमान मैप तैयार करेंगे. यदि ये माप मान ज्वालामुखी कांच के典型िक मान (उच्च SiO2 अनुपात और विशिष्ट oxygen isotope ratio) से मेल खाते हैं, तो पुराने magma chamber की मौजूदगी की पुष्टि हो जाएगी.
加えて, Mio यान बुध के चुंबकीय क्षेत्र और सौर पवन के साथ इसके interaktion का अध्ययन करेगा, जिससे ग्रह के आतंरिक तापीय विकास की भी जानकारी मिलेगी. इन दोनों उपकरणों से प्राप्त डेटा को मिलाकर वैज्ञानिक बुध के भू‑वैज्ञानिक इतिहास का मॉडल तैयार कर सकेंगे.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि बीपीकोलंबो के परिणाम सकारात्मक रहे, तो यह प्रमाणित करेगा कि बुध曾经 एक गर्म, ज्वालामुखी सक्रिय ग्रह था, जिसकी सतह पर लगातार लावा बहता रहा होगा. अरबों वर्षों में धीरे‑धीरे ठंडा होने के बाद आज हम देख रही शांत, क्रेटर से भरपूर सतह बची है. यह खोज सौर मंडल के चट्टानी ग्रहों के तापीय इतिहास की हमारी समझ को नया मोड़ देगी.
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
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