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नगांव उपचुनाव: पूर्व बीडीओ ने पूर्व डीसी को दी चुनौती, कांग्रेस ने शिबामोनी बोरा को उतारा

15/9/2026, 2:49:30 am
नगांव उपचुनाव: पूर्व बीडीओ ने पूर्व डीसी को दी चुनौती, कांग्रेस ने शिबामोनी बोरा को उतारा
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असम के नगांव विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की तारीख नजदीक आते ही मुकाबला दिलचस्प हो गया है। पूर्व ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) रहीं सुमित्रा देवी ने पूर्व जिला कलेक्टर (डीसी) रहे राजेश कुमार को सीधी चुनौती दी है। दोनों उम्मीदवार अपने प्रशासनिक अनुभव को वोटरों के सामने रख रहे हैं। सुमित्रा देवी ने अपने कार्यकाल में ग्रामीण सड़क, पेयजल और स्वच्छता योजनाओं को तेजी से लागू किया था, जिसका जिक्र वह हर सभा में करती हैं। राजेश कुमार ने जिला स्तर पर कानून‑व्यवस्था और राजस्व प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई थी, और वह इसे अपनी ताकत बताते हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर शिबामोनी बोरा को मैदान में उतारा है, जो पहले भी स्थानीय राजनीति में सक्रिय रही हैं। बोरा का दावा है कि वह ग्रामीण विकास, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देंगी। भाजपा ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, जिससे विपक्षी दलों को रणनीति बनाने का मौका मिला है। पिछले चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने 12 हजार मतों से जीत हासिल की थी, लेकिन विधायक के निधन के बाद खाली हुई सीट पर नए समीकरण बन रहे हैं। स्थानीय मतदाताओं का कहना है कि प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों से उन्हें बेहतर शासन की उम्मीद है। नगांव क्षेत्र चाय बागानों और बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए जाना जाता है, जहां रोजगार और बुनियादी सुविधाएं प्रमुख मुद्दे हैं। चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और सभी बूथों पर केंद्रीय बल तैनात किए जाएंगे। चुनाव आयोग ने मतदाता जागरूकता अभियान भी शुरू किया है, ताकि ग्रामीण मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर सकें। प्रचार अभियान में दोनों पूर्व अधिकारी अपनी‑अपनी योजनाएं बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक नेटवर्क का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। सुमित्रा देवी ने घर‑घर जाकर महिला मतदाताओं से मिलने का कार्यक्रम शुरू किया है, जबकि राजेश कुमार ने युवा मोर्चा के साथ रैलियां आयोजित की हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस त्रिकोणीय मुकाबले में मतदाता विकास के मुद्दे पर फैसला लेंगे। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस की उम्मीदवार शिबामोनी बोरा का स्थानीय संपर्क नेटवर्क इस मुकाबले को निर्णायक बना सकता है। नतीजे 23 सितंबर को घोषित होंगे और इससे असम की राजनीतिक तस्वीर पर असर पड़ेगा। परिणाम के बाद राज्य सरकार की नई नीतियों पर भी असर पड़ सकता है, खासकर ग्रामीण विकास योजनाओं पर।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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