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एनसीईआरटी ने 11वीं-12वीं राजनीतिक विज्ञान की किताबों के लिए नई टीम बनाई, चार सदस्य RSS से जुड़े

19/8/2026, 3:51:53 am
एनसीईआरटी ने 11वीं-12वीं राजनीतिक विज्ञान की किताबों के लिए नई टीम बनाई, चार सदस्य RSS से जुड़े
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एनसीईआरटी ने 11वीं और 12वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली विकास टीम को नए सिरे से गठित किया है। नई समिति में कुल सात सदस्य शामिल हैं, जिनमें से चार का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बताया जा रहा है। इस फैसले की आधिकारिक घोषणा सोमवार को नई दिल्ली स्थित एनसीईआरटी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई। एनसीईआरटी के निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही और विषय विशेषज्ञता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सदस्यों का चयन शैक्षणिक योग्यता और पूर्व प्रकाशनों के आधार पर किया गया है। हालांकि, कई शिक्षाविदों, विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों ने इस निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि संघ से जुड़े सदस्यों की मौजूदगी पाठ्यक्रम में एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा दे सकती है। पहले भी इतिहास, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र की किताबों में संशोधन को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। उस समय भी आरोप लगे थे कि पाठ्य सामग्री को राजनीतिक एजेंडा के अनुरूप ढाला जा रहा है। राजनीतिक विज्ञान जैसे संवेदनशील विषय पर नई टीम बनने से यह चिंता और बढ़ गई है। सरकार की ओर से जारी बयान में दावा किया गया है कि नई टीम पाठ्य सामग्री को अद्यतन, संतुलित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाएगी। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को अब नई किताबों का इंतजार है, जो अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षाओं में पहुंचेंगी। विपक्षी नेता राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा कि यह कदम शिक्षा का राजनीतिकरण करने की कोशिश है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जवाब में कहा कि पाठ्यक्रम निर्माण में विविध दृष्टिकोण आवश्यक हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. कृष्ण कुमार ने चेताया कि विचारधारात्मक प्रभाव से शैक्षणिक स्वतंत्रता खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि समिति में स्वतंत्र विद्वानों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। एनसीईआरटी ने आश्वासन दिया है कि अंतिम पाठ्यपुस्तक की समीक्षा एक स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल द्वारा की जाएगी। यह पैनल पाठ्य सामग्री की तटस्थता, सटीकता और समावेशिता की जांच करेगा। तब तक, मौजूदा किताबें कक्षाओं में चलती रहेंगी और नई सामग्री का परीक्षण पायलट स्कूलों में किया जाएगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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