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नेपाल में बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण पर खर्च होंगे अरबों डॉलर, भारत समेत कई देशों ने बढ़ाया हाथ
8/9/2026, 1:56:21 am

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नेपाल में पिछले महीने आई भयानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। सैकड़ों जानें गईं, हजारों घर बह गए और सड़क-पुल जैसे बुनियादी ढांचे तहस-नहस हो गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस आपदा से करीब 12 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अब बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन असली चुनौती पुनर्निर्माण की है।
नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग ने शुरुआती आकलन में बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण पर करीब 1.2 अरब डॉलर यानी लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें आवास, सड़क, पुल, बिजली-पानी की लाइनें, स्कूल और अस्पताल दोबारा बनाने का खर्च शामिल है। नेपाल सरकार इतनी बड़ी रकम अकेले जुटा नहीं सकती, इसलिए अंतरराष्ट्रीय मदद पर उसकी नजर टिकी है।
राहत और बचाव के शुरुआती चरण में भारत, चीन, अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने तत्काल सहायता भेजी। भारत ने ऑपरेशन मैत्री के तहत राहत सामग्री, दवाएं और बचाव दल भेजे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से फोन पर बात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया। चीन ने भी टेंट, कंबल और चिकित्सा सामग्री मुहैया कराई। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने नकद सहायता और राहत सामग्री भेजी।
लेकिन अब नेपाल को दीर्घकालिक पुनर्निर्माण के लिए मदद चाहिए। नेपाल के वित्त मंत्री बिष्णु प्रसाद पौडेल ने कहा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं के साथ बैठक कर रही है। विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक ने भी कर्ज और अनुदान के जरिए मदद का संकेत दिया है। भारत की ओर से विकास सहायता के तहत सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं में मदद जारी रहने की उम्मीद है।
जानकार मानते हैं कि पुनर्निर्माण में पारदर्शिता और तेजी दोनों जरूरी हैं। 2015 के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण की धीमी रफ्तार से सबक लेते हुए इस बार नेपाल सरकार ने नई व्यवस्था बनाई है। स्थानीय निकायों को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं ताकि काम तेजी से हो। लेकिन पहाड़ी इलाकों में काम करना अब भी चुनौतीपूर्ण है। मानसून खत्म होने के बाद ही बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू हो पाएगा।
नेपाल के आम लोगों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सिर पर छत और रोजी-रोटी की है। हजारों परिवार अब भी अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं। सरकार ने नकद सहायता की घोषणा की है, लेकिन वितरण में देरी की शिकायतें आ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निरंतर मदद और नेपाल सरकार की कुशल योजना ही इस हिमालयी देश को फिर से खड़ा कर पाएगी।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
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