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नेपाल में बाढ़ का कहर दिखा, पर तिब्बत में क्या हुआ यह चीन छिपा रहा

1/9/2026, 12:00:46 pm
नेपाल में बाढ़ का कहर दिखा, पर तिब्बत में क्या हुआ यह चीन छिपा रहा
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नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने तबाही मचाई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लापता हैं। हजारों घर बह गए, सड़कें टूट गईं और पुल ढह गए। राहत टीमें दिन-रात लगी हैं, पर पानी का वेग इतना तेज था कि कई गांवों तक पहुंचना अब भी मुश्किल है। मगर सवाल यह उठता है कि यह सैलाब आया कहां से? नदियों का उद्गम तिब्बत के पहाड़ों में है। चीनी सीमा के अंदर भारी बारिश और ग्लेशियर टूटने से पानी का भंडार अचानक फूटा। नेपाल की नदियों — त्रिशूली, भोटेकोशी और सुनकोशी — में जलस्तर रातों-रात खतरे के निशान से ऊपर चला गया। चीन ने अपने इलाके में हुई तबाही का कोई आधिकारिक ब्यौरा जारी नहीं किया। न मरने वालों की संख्या, न प्रभावित गांवों की जानकारी, न ही बांधों या जलाशयों की स्थिति। चीनी मीडिया पर भी खबरें नहीं के बराबर हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से इतना पता चलता है कि तिब्बत के कई इलाके पानी में डूबे हैं, पर जमीनी हक़ीक़त ढकी हुई है। नेपाली अधिकारी मानते हैं कि चीन से समय पर सूचना मिलती तो तैयारी बेहतर होती। दोनों देशों के बीच नदी समझौता है, पर डेटा साझा करने का तंत्र कमजोर है। जानकार कहते हैं कि चीन अपने सीमावर्ती इलाकों की संवेदनशीलता के चलते जानकारी रोकता है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी चिंतित हैं। संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस ने चीन से पारदर्शिता मांगी है। उधर, नेपाल में विपक्षी दल सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह बीजिंग से सख्ती से बात करे। जलवायु परिवर्तन के दौर में हिमालयी नदियों का व्यवहार बदल रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं, झीलें फट रही हैं। अगर ऊपरी इलाकों की असलियत छिपी रही, तो नीचे बसे लाखों लोगों की जान जोखिम में रहेगी। सच सिर्फ नेपाल के लिए नहीं, पूरे क्षेत्र के लिए जरूरी है।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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