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नेपाल बाढ़: चीन पर डेटा छिपाने के आरोप, क्या बचाई जा सकती थीं जानें?

26/8/2026, 4:15:18 am
नेपाल बाढ़: चीन पर डेटा छिपाने के आरोप, क्या बचाई जा सकती थीं जानें?
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नेपाल में अगस्त 2026 के मध्य में भारी मानसून बारिश ने कोशी, गंडकी और नारायणी नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ा दिया। सप्तरी, सिंधुली, मकवानपुर और बारा जैसे जिले पानी में डूब गए और लाखों लोग बेघर हो गए। प्रशासन का कहना है कि जलस्तर में तेजी की सूचना समय पर नहीं मिली, जिससे बचाव और राहत कार्य देर से शुरू हुए। कुछ विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि चीन के दक्षिणी तिब्बत में बने बांधों से वास्तविक समय का जल‑स्तर डेटा नेपाल को नहीं दिया गया। उनका तर्क है कि अगर नेपाल को ऊपरी धारा से पानी के बहाव की सही जानकारी मिलती, तो बाढ़ की चेतावनी पहले जारी की जा सकती थी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता था। चीन की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मौजूदा हाइड्रोलॉजिकल डेटा‑साझाकरण व्यवस्था के तहत वह नियमित रूप से सूचनाएं भेजता रहा है। चीनी अधिकारियों ने बताया कि मई‑जून 2026 में उच्च जलस्तर की चेतावनी भेजी गई थी, लेकिन स्थानीय एजेंसियों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विभाग (डीएचएम) ने माना कि उसकी अपनी पूर्वानुमान प्रणाली में कुछ सीमाएं हैं और सीमा‑पार डेटा आदान‑प्रदान को और मजबूत करने की जरूरत है। क्षेत्रीय जानकारों ने सुझाव दिया है कि नेपाल, चीन और भारत जैसे ऊपरी धारा वाले देशों के बीच एक स्थायी डेटा‑साझाकरण समझौता बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने में सुधार हो सके। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस बाढ़ में अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 40,000 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। सड़कें, पुल और बिजली लाइनें टूट जाने से दूरदराज के गांवों तक मदद पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। भारत ने भी नेपाल को राहत सामग्री और चिकित्सा दल भेजे हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय सहायता के लिए अपील जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून की तीव्रता बढ़ रही है, इसलिए दीर्घकालिक योजना और बेहतर पूर्वानुमान तंत्र अनिवार्य हैं। नेपाल सरकार ने घोषणा की है कि वह चीन के साथ नए हाइड्रोलॉजिकल समझौते पर बातचीत शुरू करेगी, जिसमें वास्तविक समय के डेटा साझाकरण, संयुक्त निगरानी स्टेशन और आपातकालीन प्रोटोकॉल शामिल होंगे। यदि यह समझौता लागू होता है, तो भविष्य में बाढ़ की चेतावनी अधिक सटीक और समय पर मिल सकेगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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