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नेपाल में बाढ़ के बाद लाशों से फैला संक्रमण, बीमार पड़ रहे बचे हुए लोग

30/8/2026, 7:49:10 pm
नेपाल में बाढ़ के बाद लाशों से फैला संक्रमण, बीमार पड़ रहे बचे हुए लोग
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नेपाल में पिछले हफ्ते आई भीषण बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन उसके पीछे एक नया संकट खड़ा हो गया है। पहाड़ी इलाकों में फंसी लाशें अब सड़ने लगी हैं और उनका गंदा पानी नदियों और कुओं में मिल रहा है। इससे पीने का पानी दूषित हो गया है और बचे हुए लोगों में हैजा, टाइफाइड और पेचिश जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में काठमांडू घाटी और आसपास के जिलों में 400 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त और तेज बुखार की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ये लक्षण दूषित पानी पीने के हैं। सबसे बुरा हाल दूरदराज के गांवों का है, जहां अब तक राहत टीमें नहीं पहुंच पाई हैं। राष्ट्रीय जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला के निदेशक डॉ. प्रभात अधिकारी ने बताया कि पानी के नमूनों में ई-कोलाई और विब्रियो कोलेरा के जीवाणु मिले हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्दी साफ पानी और दवाएं नहीं पहुंचीं तो महामारी फैल सकती है। सरकार ने प्रभावित जिलों में क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस बांटना शुरू किया है, लेकिन मांग बहुत ज्यादा है। सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवान लाशों को निकालने और उनका अंतिम संस्कार करने में लगे हैं। अब तक 150 से ज्यादा शव निकाले जा चुके हैं, लेकिन सैकड़ों अब भी मलबे में दबे हैं। लगातार बारिश और भूस्खलन से राहत काम में बाधा आ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नेपाल को आपात चिकित्सा किट और पानी साफ करने के उपकरण भेजे हैं। स्थानीय लोग सरकारी मदद का इंतजार करते-करते थक गए हैं। कई गांवों में लोग खुद ही कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डाल रहे हैं और बरसात का पानी उबालकर पी रहे हैं। एक ग्रामीण ने कहा, "हमारे पास कोई चारा नहीं। पानी पिएंगे तो मरेंगे, नहीं पिएंगे तो भी मरेंगे।" नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है। भारत, चीन और कई यूरोपीय देशों ने राहत सामग्री भेजने का भरोसा दिया है। लेकिन असली चुनौती पहाड़ी रास्तों तक सामान पहुंचाने की है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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