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नेपाल बाढ़: अमेरिका समेत कई देशों ने रोकी मदद, ट्रंप की नीति से राहत कार्य प्रभावित

10/9/2026, 1:42:09 am
नेपाल बाढ़: अमेरिका समेत कई देशों ने रोकी मदद, ट्रंप की नीति से राहत कार्य प्रभावित
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नेपाल में पिछले सप्ताह हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक 217 लोगों की मौत हो चुकी है और 48 लापता हैं। 15 हजार से ज्यादा घर पूरी तरह ढह गए हैं जबकि करीब तीन लाख लोग विस्थापित हुए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान कोसी, गंडकी और कर्णाली नदी घाटियों में हुआ है। सड़कें, पुल और बिजली लाइनें कई जगहों पर बह गई हैं, जिससे दूरदराज के गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। शुरुआत में अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और यूरोपीय संघ ने त्वरित सहायता की घोषणा की थी। अमेरिकी विदेश विभाग ने डेढ़ करोड़ डॉलर की आपात मदद मंजूर की थी। मगर पिछले शुक्रवार को व्हाइट हाउस ने नई विदेश सहायता नीति का हवाला देकर सभी गैर‑जरूरी अनुदान तत्काल प्रभाव से रोक दिए। ब्रिटेन और कनाडा ने भी अपने योगदान की समीक्षा शुरू कर दी। यूरोपीय आयोग ने भी अपने बजट में कटौती के संकेत दिए हैं। नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इसे असंवेदनशील बताते हुए कहा कि जब लोग कीचड़ में दबे हैं तब मदद रोकना अमानवीय है। विदेश मंत्री अरजू राणा देउबा ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की, पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। ओली ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे मानवीय आधार पर सहायता जारी रखें। राहत शिविरों में दवा, साफ पानी और तिरपाल की भारी कमी है। नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर मौसम खराब होने के कारण उड़ान नहीं भर पा रहे। स्थानीय एनजीओ का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय फंड रुकने से अगले 72 घंटे बेहद नाजुक हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेताया है कि अगर सप्लाई चेन बहाल न हुई तो कुपोषण का संकट गहरा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए खास तौर पर पोषण सामग्री की कमी देखी जा रही है। भारत ने ऑपरेशन मैत्री के तहत 15 टन राहत सामग्री और पांच मेडिकल टीमें भेजी हैं। चीन ने भी बीस लाख डॉलर की सहायता दी है। पर पश्चिमी देशों की बड़ी हिस्सेदारी गायब होने से कुल फंडिंग में करीब चालीस फीसदी की गिरावट आई है। नेपाल सरकार अब अपने संसाधनों पर ज्यादा निर्भर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल सहायता बहाल करने की अपील कर रही है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिन और भारी बारिश की चेतावनी दी है। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे नए बाढ़ क्षेत्र बन सकते हैं। अधिकारी लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने का अनुरोध कर रहे हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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