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नेपाल बाढ़: टूटे पुलों के बीच जिप लाइन बनी ग्रामीणों की जीवनरेखा

5/9/2026, 3:55:40 pm
नेपाल बाढ़: टूटे पुलों के बीच जिप लाइन बनी ग्रामीणों की जीवनरेखा
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नेपाल के पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश और अचानक आई बाढ़ ने दर्जनों पुलों को या तो बहा दिया है या उन्हें असुरक्षित बना दिया है। इसका सबसे बुरा असर दूरदराज के गांवों पर पड़ा है, जहां बाजार, अस्पताल और स्कूल जाने का रास्ता ही कट गया। ऐसे में स्थानीय लोगों ने एक देसी जुगाड़ निकाला — स्टील के तार पर चलने वाली छोटी केबिननुमा ट्रॉली, जिसे स्थानीय भाषा में 'तुइन' कहते हैं। इस अस्थायी व्यवस्था के तहत एक बार में चार-पांच लोग केबिन में बैठते हैं और रस्सी के सहारे नदी पार करते हैं। संचालक बताते हैं कि सुबह से शाम तक दोनों तरफ से लगभग 100-100 लोग इस सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी रोजाना करीब 200 आवाजाही। जिला प्रशासन ने इस व्यवस्था को फिलहाल मान्यता दे दी है, क्योंकि वैकल्पिक रास्ता बनाने में हफ्तों लगेंगे। हालांकि सुरक्षा जांच के लिए एक तकनीकी टीम भी भेजी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि डर तो लगता है, लेकिन मजबूरी है। बीमार को अस्पताल ले जाना हो या बच्चों को स्कूल भेजना हो, यही एक रास्ता बचा है। मानसून सीजन में नेपाल में हर साल ऐसी स्थिति आती है, लेकिन इस बार बारिश की तीव्रता असामान्य रही। मौसम विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में 24 घंटे में 200 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज हुई। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। राहत एजेंसियां अस्थायी पुल बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन भूस्खलन और तेज बहाव के कारण काम धीमा है। तब तक यह जिप लाइन ही ग्रामीणों की जीवनरेखा बनी हुई है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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