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नेपाल: ग्लोबल वार्मिंग का जिम्मेदार नहीं, फिर भी आपदाओं का शिकार

1/9/2026, 1:45:35 am
नेपाल: ग्लोबल वार्मिंग का जिम्मेदार नहीं, फिर भी आपदाओं का शिकार
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नेपाल एक पहाड़ी मुल्क है जहाँ आबादी भारत और चीन के मुक़ाबले बहुत कम है। फिर भी यहाँ हर साल बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर टूटने जैसी आपदाएँ आती रहती हैं। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में नेपाल का हिस्सा न के बराबर है। देश की ऊर्जा ज़्यादातर जलविद्युत और बायोमास से आती है, इसलिए कार्बन फुटप्रिंट छोटा रहता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन का असर यहाँ सबसे ज़्यादा दिखता है। हिमालय के ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं, जिससे नदियों में पानी का बहाव अचानक बढ़ जाता है और निचले इलाक़ों में बाढ़ आ जाती है। पहाड़ों की ढलानें कमज़ोर हैं, इसलिए भारी बारिश से मिट्टी खिसक जाती है। पिछले दशक में कई बड़े भूस्खलन हुए, जिनमें सैकड़ों घर तबाह हुए और जानें गईं। नेपाल सरकार ने जलवायु अनुकूलन की योजनाएँ बनाई हैं, पर धन और तकनीक की कमी से लागू करना मुश्किल है। अंतरराष्ट्रीय सहायता भी सीमित रहती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र की नाज़ुकता और वैश्विक तापमान वृद्धि का मिला-जुला असर नेपाल को बार-बार आपदा का शिकार बनाता है। स्थानीय समुदायों को जागरूक करना और पूर्व चेतावनी प्रणाली मजबूत करना ज़रूरी है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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