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नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़: ग्लेशियर नहीं, कई वजहें जिम्मेदार

17/9/2026, 12:38:02 pm
नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़: ग्लेशियर नहीं, कई वजहें जिम्मेदार
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नेपाल के खुम्बू इलाके में पिछले महीने आई भीषण बाढ़ ने थामे गांव को तबाह कर दिया था। शुरुआती जांच में ग्लेशियर झील फटने (GLOF) को वजह बताया गया, लेकिन इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की नई स्टडी ने तस्वीर बदल दी है। स्टडी कहती है कि अकेला ग्लेशियर टूटना जिम्मेदार नहीं। पर्माफ्रॉस्ट — यानी हमेशा जमी रहने वाली मिट्टी — के पिघलने से ढलान कमजोर हुए। फिर भारी बारिश ने मलबे को बहा दिया। ये दोनों मिलकर विनाशकारी मडफ्लो बन गए। थामे के निवासी पासांग शेरपा बताते हैं, "रात को अचानक शोर आया, जैसे ट्रेन गुजर रही हो। सुबह देखा तो घर, खेत, पुल सब बह चुके थे।" बाढ़ ने 20 से ज्यादा घर, एक स्कूल, मठ और हाइड्रोपावर प्लांट नष्ट किए। वैज्ञानिक डॉ. अर्जुन भट्टराई के मुताबिक, "हिमालय में तापमान वैश्विक औसत से दोगुना रफ्तार से बढ़ रहा है। पर्माफ्रॉस्ट पिघलना अब आम बात है, जिससे पहाड़ अस्थिर हो रहे हैं।" स्टडी में सैटेलाइट तस्वीरों और जमीनी सर्वे का इस्तेमाल हुआ। पता चला कि थामे के ऊपर स्थित झील का पानी अचानक नहीं निकला, बल्कि कई दिनों तक रिसता रहा। फिर 16 अगस्त की भारी बारिश ने हालात बेकाबू कर दिए। नेपाल सरकार अब अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने पर विचार कर रही है। लेकिन पहाड़ी गांवों तक पहुंच मुश्किल है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि पुनर्वास के साथ-साथ दीर्घकालिक योजना बने। जलवायु परिवर्तन ने हिमालय को 'टिक टिक करता बम' बना दिया है। थामे की घटना चेतावनी है — अगली बाढ़ कहीं भी आ सकती है।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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