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संयुक्त राष्ट्र में ईरान प्रतिबंधों पर टकराव, रूस-चीन ने अमेरिकी प्रस्ताव रोका

18/9/2026, 12:05:26 am
संयुक्त राष्ट्र में ईरान प्रतिबंधों पर टकराव, रूस-चीन ने अमेरिकी प्रस्ताव रोका
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को ईरान पर लगे प्रतिबंधों की निगरानी को लेकर तीखा टकराव देखने को मिला। अमेरिका की ओर से लाए गए एक प्रस्ताव पर रूस और चीन ने वीटो लगा दिया। इस प्रस्ताव में परमाणु समझौते (जेसीपीओए) के तहत लगे प्रतिबंधों का पालन कराने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों की एक टीम गठित करने का प्रावधान था। वीटो के चलते प्रस्ताव पारित नहीं हो सका और ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक मुहिम को बड़ा झटका लगा है। बैठक में सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 13 ने अमेरिकी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। केवल रूस और चीन ने विरोध किया। लेकिन स्थायी सदस्य होने के नाते उनके वीटो ने प्रस्ताव को गिरा दिया। राजनयिक सूत्रों के अनुसार रूस और चीन का तर्क था कि यह प्रस्ताव एकतरफा ढंग से लाया गया है और इससे परिषद में मतभेद गहरे होंगे। दोनों देशों ने जोर देकर कहा कि ईरान मसले का हल बातचीत और राजनीतिक प्रक्रिया से ही निकलना चाहिए। अमेरिका का कहना था कि ईरान लगातार परमाणु समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। यूरेनियम संवर्धन की सीमा लांघने और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों की पहुंच रोकने जैसे कदमों से चिंता बढ़ी है। इसलिए प्रतिबंधों की प्रभावी निगरानी के लिए विशेषज्ञ टीम जरूरी है। विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने वीटो के बाद बयान जारी कर इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण और खतरनाक' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस और चीन अपने व्यावसायिक हितों के लिए ईरान को बचा रहे हैं। ईरान ने वीटो का स्वागत करते हुए कहा कि उस पर लगाए गए प्रतिबंध गैरकानूनी और एकतरफा हैं। तेहरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रवक्ता ने दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है। वहीं इजराइल और खाड़ी के सहयोगी देशों ने निराशा जताई। उनका मानना है कि बिना सख्त निगरानी के ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटनाक्रम बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ते अविश्वास को उजागर करता है। 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने के बाद से ही स्थिति बिगड़ती गई है। अब सुरक्षा परिषद में आम राय बनना लगभग असंभव दिख रहा है। जानकार मानते हैं कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका एकतरफा प्रतिबंध और कड़े कर सकता है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने के आसार हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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