लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

रोजगार के नए केंद्र: प्रयागराज, लेह और उधमसिंह नगर में तेजी से बढ़ी श्रमिक गतिविधियां

15/9/2026, 2:33:07 am
रोजगार के नए केंद्र: प्रयागराज, लेह और उधमसिंह नगर में तेजी से बढ़ी श्रमिक गतिविधियां
Original publisher image
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट ने भारत के रोजगार परिदृश्य में नए केंद्रों की पहचान की है। सर्वे के अनुसार प्रयागराज, लेह और उधमसिंह नगर में श्रमिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कई अन्य शहरों में महिलाओं की भागीदारी ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है। प्रयागराज में पिछले दो साल में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के तहत सड़क, जलापूर्ति और सीवेज नेटवर्क के निर्माण कार्य तेजी से बढ़े हैं। इसके अलावा, कुम्भ मेला और अन्य धार्मिक आयोजनों के कारण होटल, रेस्टोरेंट और परिवहन सेवाओं में अकुशल तथा अर्धकुशल श्रमिकों की मांग 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। स्थानीय उद्यमी बताते हैं कि प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से युवाओं को मशीन संचालन और विद्युत कार्य का कौशल सिखाया जा रहा है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में सुधार हुआ है। लेह की स्थिति थोड़ी अलग है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा लद्दाख में रणनीतिक सड़कें और पुल बनाए जा रहे हैं, जो पूरे वर्ष चलने वाले कार्य बन गए हैं। पर्यटन सीजन अब अप्रैल से अक्टूबर तक बढ़ गया है, जिसके कारण गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और ट्रेकिंग गाइड की जरूरत पिछले साल से 15 प्रतिशत अधिक हो गई है। इस इलाके में आए बाहरी श्रमिकों को अक्सर अस्थायी आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ा है। उधमसिंह नगर में मौजूदा उद्योगपतियों ने अपने प्लांटों की क्षमता बढ़ाने के साथ‑साथ नए कपड़ा विनिर्माण और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की है। इन विकासों ने जिले के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने का अवसर प्रदान किया है, जबकि पड़ोसी राज्यों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों को भी fábrica में ऑपरेटर और पैकिंग सुपरवाइजर के पद मिले हैं। उद्योग संघ के अनुसार, यहाँ पर औसत वेतन में पिछले साल 10 प्रतिशत की वृद्धि आई है। महिला श्रमिकों की भागीदारी में सबसे बड़ा बदलाव दक्षिण और पश्चिम भारत में देखा गया है। तमिलनाडु के तिरुप्पुर और कोयंबटूर में कपड़ा मिलों ने महिलाओं को सिलाई, कटाई और गुणवत्ता जांच के पदों पर प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है, जिससे उनकी हिस्सेदारी 55 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कर्नाटक के मैसूरु में इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली लाइनों पर महिलाएं पुरुषों की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक संख्या में काम कर रही हैं। केरल के एर्नाकुलम में आईटी सपोर्ट और डेटा एंट्री के कार्यों में लचीली शिफ्ट और कार्य‑से‑घर विकल्पों ने महिला劳动力 की भागीदारी को आकर्षित किया है। श्रम विशेषज्ञ डॉ. रेखा शर्मा बताती हैं कि लक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सुरक्षित यातायात सुविधाओं ने इन क्षेत्रों में महिलाओं को संगठित क्षेत्र में बनाए रखने में मदद की है। ग्रामीण India में मनरेगा के तहत काम मांगने वाली महिलाओं का अनुपात पहली बार 52 प्रतिशत को पार कर गया है, जो दर्शाता है कि ग्रामीण महिलाएं अब आय कमाने के लिए सार्वजनिक कामों की ओर अधिक आकर्षित हो रही हैं। हालांकि शहरों के अनौपचारिक क्षेत्र में, जैसे रेहड़ी‑पटरी और घरेलू कामकाज, महिलाओं की औसत मजदूरी अभी भी पुरुषों की तुलना में 18‑20 प्रतिशत कम है। इस अंतर को पाटने के लिए कई राज्य सरकारों ने न्यूनतम मजदूरी कानूनों की कड़ी पालना और महिला कुशलता प्रशिक्षण योजनाओं को शुरू किया है। रिपोर्ट नीति निर्माताओं को स्पष्ट संकेत देती है कि कौशल विकास केंद्रों के विस्तार, लिंग संवेदनशील कार्यस्थल नीतियों और आधारभूत संरचना में निवेश से रोजगार वृद्धि को सतत बनाया जा सकता है। यदि इन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाए तो न केवल कुल रोजगार संख्या बढ़ेगी, बल्कि काम की गुणवत्ता और श्रमिकों की आय भी सुधरेगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित