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बिहार में बाढ़‑गाद पर नीतीश का नया अभियान, फरक्का संधि 2026 में खत्म

12/9/2026, 2:58:44 am
बिहार में बाढ़‑गाद पर नीतीश का नया अभियान, फरक्का संधि 2026 में खत्म
बिहार में बाढ़ और गाद की समस्या एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर अपना अभियान तेज किया है। जनता दल (यूनाइटेड) ने पार्टी की रणनीति में नई धार डाली है। साल 2026 में फरक्का संधि की अवधि समाप्त हो रही है, जिससे नदी प्रबंधन पर नए सिरे से बातचीत की जरूरत पड़ेगी। नीतीश ने हाल की रैली में कहा कि गाद जमा होने से नदियों का बहाव कम हो रहा है और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से फरक्का बैराज के संचालन में बदलाव की मांग की है। जदयू नेताओं ने बताया कि पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा और संसद दोनों में उठाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि संधि खत्म होने के बाद भारत‑बांग्लादेश जल बंटवारे पर नया समझौता करना होगा। बिहार के कई जिले हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं, जिससे फसलें बर्बाद होती हैं और लाखों लोग विस्थापित होते हैं। राज्य सरकार ने गाद निकालने के लिए मशीनीकृत योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन धन की कमी और तकनीकी बाधाएं अब भी बड़ी चुनौती हैं। नीतीश ने कहा कि वे केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ मिलकर दीर्घकालिक समाधान तलाशेंगे। पार्टी ने ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया है ताकि लोग बाढ़ पूर्व तैयारियों को समझ सकें। स्थानीय प्रशासन को नदी किनारे बसे गांवों के लिए आपातकालीन योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश का पैटर्न बदल रहा है, जिससे बाढ़ की तीव्रता बढ़ सकती है। इसलिए समय रहते ठोस कदम उठाना ज़रूरी है। केंद्र ने पिछले वर्ष फरक्का बैराज के गेट संचालन में कुछ परिवर्तन किए थे, पर बिहार का दावा है कि ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। राज्य सरकार अब नए तकनीकी अध्ययन के लिए आईआईटी पटना और एनआईटी राउरकेला के विशेषज्ञों को आमंत्रित कर रही है। जनता दल (यूनाइटेड) ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे गांव‑गांव जाकर बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं दर्ज करें और उन्हें सरकार तक पहुंचाएं। इससे नीति निर्माताओं को ज़मीनी हकीकत का अंदाज़ा मिलेगा। आने वाले महीनों में मुख्यमंत्री दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्रियों से सीधी बातचीत करेंगे, ताकि फरक्का संधि के नवीनीकरण में बिहार की चिंताएं शामिल हों। साथ ही वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बाढ़ प्रबंधन के लिए सहयोग मांग सकते हैं। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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